पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा!: पाकिस्तान में छुप कर बैठा है मासूमों की जान लेने वाला मास्टरमाइंड? आईडेंटी प्रूफ में सामने आई असली पहचान

पाकिस्तान में छुप कर बैठा है मासूमों की जान लेने वाला मास्टरमाइंड? आईडेंटी प्रूफ में सामने आई असली पहचान
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल बाद मास्टरमाइंड साजिद जट्ट की पहचान का बड़ा खुलासा हुआ है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल बाद मास्टरमाइंड साजिद जट्ट की पहचान का बड़ा खुलासा हुआ है। आज तक के मुताबिक, पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी गतिविधियों का नेटवर्क और हमलों की प्लानिंग करने वाले साजिद जट्ट की हालिया तस्वीर के साथ पूरी जानकारी सामने आई है। साजिद लश्कर और टीआरएफ के बड़े आतंकियों में से एक है। हैरानी की बात तो यह है कि वह पाकिस्तान में अपने नाम और हुलिया को छुपाकर दुनिया की नजरों से बचते बचाते फिर रहा है।

पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड की पहचान का हुआ खुलासा

आज तक की टीम ने पड़ताल के बाद उस आतंकी के असली घर और उसके पाकिस्तानी होने से जुड़े वो अहम दस्तावेजों के सबूत ढूंढ निकाले हैं। जो उसने दुनिया से अब तक छुपा कर रखे थे। पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए ने साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह साजिद बताया था। इस पड़ताल में खुलासा हुआ है कि उसका असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है। इसके इशारों पर बैरसन घाटी में घूमने आए पर्यटकों पर गोली चलाई गई थी। एनआईए ने इसे आतंकी को मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में रखते हुए इस पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था।

सूरत-ए-हाल यह है कि पहलगाम में मासूमों को मौत के घाट उतारने वाला मास्टरमाइंड अब खुद भागते बचाते फिर रहा है। जांच के दौरान वो आईडी कार्ड भी हाथ लगा है जिससे उसके झूठ की पोल खुल गई है। इन कागजों से खुलासा होता है कि वह अपनी उम्र और नाम बदलकर पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में छिपने के ठिकाने बना रहा है। कसूर की गलियों से लेकर रावलपिंडी के किराए के कमरों तक। इस जांच में उसकी हर छिपने वाली जगहों का खुलासा हो गया है।

दुनिया की नजरों से बचता बचाता फिर रहा साजिद जट्ट

दरअसल, यहां पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी का साजिद जट्ट पर हाथ है। वो उसे इन जगहों पर साजिद को एक आम आदमी के रूप में बनने में मदद कर रही है। साजिद और उसके आकाओं को अज्ञात हमलावारों का खौफ सता रहा है। जो पाकिस्तान में घुसकर भारत के दुश्मनों को मार रहे हैं। इस खौफ का नतीजा यह है कि अब साजिद को बड़े कमांडर से गिरकर एक साधारण आदमी बनकर रहना पड़ रहा है। आज तक द्वारा जारी तस्वीरों के मुताबिक, साजिद एक साधारण घर में रह रहा है। वह पुराने कपड़ों में और एक बहुत पुराने की-पैड वाले मोबाइल फोन के साथ नजर आ रहा है। इससे किसी को शक न हो।

इतना ही नहीं, बल्कि साजिद की पहचान का खुलासा दो अलग-अलग आईडेंटी प्रूफ से भी हुई है। जिससे उसके झूठ का पर्दाफाश होता है। पहला आईडेंटी प्रूफ 26 अप्रैल 2015 का है। इसमें उसका पता कसूर जिला और जन्म की तारीख 23 मार्च 1976 दर्ज है। जबकि, दूसरे आईडेंटी प्रूफ में उसका पता इस्लामाबाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले जी-6 इलाका का दर्ज है। इस आईडेंटी पत्र में साजिद ने बड़ी चालाकी से अपनी उम्र को 6 साल और जन्म का साल 1982 दर्ज करवाया है। इन दोनों आईडेंटी प्रूफ में उसका सच दुनिया के सामने आ गया है। जिससे पता चलता है साजिद जट्टा का असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है और उसके पिता का नाम मोहम्मद रफीक है। जो इस मास्टरमाइंड की असली पहचान से वाकिफ कराती है।

Created On :   21 April 2026 4:23 PM IST

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