INDIA Alliance: राहुल गांधी की SIR याचिका में 14 तकनीकी खामियां, ₹220 कम मिली कोर्ट फीस

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों की न्यायिक जांच और SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने समेत कई मांगें की गई हैं।
हालांकि, याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसमें 14 तकनीकी खामियां बताई हैं। इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं होना और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट कॉपी शामिल हैं। रजिस्ट्री ने दस्तावेजों और प्रतिवादियों से जुड़ी अन्य कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया है।
यह भी पढ़े -क्यों नहीं रिलीज हो रही सलमान खान की फिल्म 'मातृभूमि'? ध्रुव राठी ने किया बड़ा दावा, यूजर्स ने दिए रिएक्शन
याचिका में कौन-कौन से विपक्षी नेता शामिल?
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीआई के डी. राजा, सीपीएम महासचिव एम.ए. बेबी, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर याचिका से जुड़े हैं। इसे अधिवक्ता एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल किया गया।
रजिस्ट्री की आपत्तियों में प्रतिवादियों के नाम में गड़बड़ी, निजी व्यक्तियों को पक्षकार बनाने का पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं देना, पुराने फैसले की प्रति संलग्न नहीं करना और दस्तावेजों की छपाई व स्पष्टता से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।
राहुल गांधी खुद तय समय से पहले नहीं पहुंचे
12 अक्टूबर को याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान राहुल गांधी शाम 4:30 बजे की समय-सीमा से पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके। इसके बाद उनके वकील एस. प्रसन्ना ने याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर मामला ‘राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ के नाम से सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका में उठाए गए मुद्दों पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों को दूर करने की प्रक्रिया के कारण सुनवाई की स्थिति याचिका के आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
यह भी पढ़े -भारत यूथ कन्वेंशन’ में शामिल हुए मनसुख मांडविया, कहा- मैंने यहां के युवाओं में एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा देखी
सुप्रीम कोर्ट से की गईं ये प्रमुख मांगें
1. SIR से जुड़े सभी दस्तावेज पेश हों
याचिका में चुनाव आयोग को SIR से संबंधित सभी जरूरी रिकॉर्ड अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें बैठकों का ब्योरा, आधिकारिक फाइलें, दर्ज आपत्तियां और फैसलों से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े ECINET और ERONET सिस्टम के एक्सेस लॉग तथा फाइल नोटिंग भी मांगी हैं।
2. चुनाव आयोग के फैसलों की कानूनी जांच हो
विपक्ष ने मांग की है कि अदालत यह जांच करे कि SIR से जुड़े फैसले संविधान और लागू कानूनों के अनुरूप लिए गए या नहीं। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में तय सिद्धांतों का हवाला दिया गया है। यदि किसी फैसले को गैरकानूनी पाया जाता है, तो उसे रद्द करने की मांग भी की गई है।
3. नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची तैयार करने या उसमें संशोधन के दौरान संवैधानिक और कानूनी नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत भी जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है।
4. शिकायतों पर उचित फैसला लिया जाए
विपक्ष ने चुनाव आयोग को SIR से संबंधित शिकायतों पर निष्पक्ष और उचित निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग के फैसलों का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए और संबंधित कानूनों के प्रावधानों का पालन हो।
5. ऑनलाइन फॉर्म-6 में मनमाना बदलाव न हो
याचिका में ऑनलाइन फॉर्म-6 को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष चाहता है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म-6, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रारूप के अनुरूप हो। नियमों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन किए बिना फॉर्म में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
6. स्वतंत्र समिति से मतदाता सूची का ऑडिट कराया जाए
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
इस समिति से SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही ECINET और ERONET जैसे डिजिटल सिस्टम में दर्ज आंकड़ों तथा उनमें किए गए बदलावों का ऑडिट कराने की बात कही गई है। याचिका में EVM से संबंधित नीतियों, नियमों और तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा का अनुरोध भी किया गया है।
7. हटाए गए मतदाताओं की जानकारी सार्वजनिक हो
याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जानकारी मतदान केंद्र के अनुसार सार्वजनिक की जाए। साथ ही नाम हटाने के कारण बताए जाएं और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
8. नोटिस और सुनवाई के बिना नाम न हटाया जाए
विपक्ष ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे नियमानुसार नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। याचिका में पंजाब सहित चुनाव वाले राज्यों में पात्र मतदाताओं को निर्धारित अंतिम तारीख तक नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया गया है।
9. SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगे
याचिका में मांग की गई है कि जब तक अदालत मामले पर अंतिम फैसला नहीं सुना देती, तब तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। विपक्ष का कहना है कि इससे पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह जरूरी समझे जाने वाले अन्य आदेश जारी करे। याचिका का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच कराना, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
फिलहाल, ये सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के सामने रखी गई मांगें हैं। इन पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई और मामले की जांच के बाद लेना है। रजिस्ट्री की ओर से बताई गई तकनीकी खामियां भी याचिका की प्रक्रिया से संबंधित हैं; इन्हें अदालत द्वारा मांगों पर दिए गए फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Created On :   13 Oct 2026 12:39 AM IST













