जंतर मंतर डिनोटिफाई: जंतर मंतर से कितने दूर प्रदर्शन के नए स्थल, नए प्रोटेस्ट प्वाइंट कितने अहम, एक ने देखा है श्यामा प्रसाद मुखर्जी और जय प्रकाश का आंदोलन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर पर सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद विपक्ष बौखला गया है। गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अब से जंतर मंतर पर विपक्ष या अन्य कोई भी दल या प्रदर्शनकारी किसी भी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन नहीं कर पाएगा। दिल्ली पुलिस ने इस जगह को डिनोटिफाई कर दिया है। लिहाजा, अब जंतर मंतर सिर्फ प्रदर्शनों का इतिहास बनकर रह जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि भविष्य में लोग विरोध प्रदर्शन करने के लिए धरना कहां देंगे? इस सवाल के जवाब में दिल्ली पुलिस ने तीन विकल्प दिए हैं, पहला रामलीला मैदान, दूसरा बुराड़ी मैदान और तीसरा सीबीडी ग्राउंड।
यानी अब से इन तीन जगहों पर लोग विरोध प्रदर्शन कर पाएंगे। दरअसल, जंतर मंतर दिल्ली के बीच में स्थित है। यहां से संसद भवन, राज भवन और पीएम आवास और समेत प्रमुख मंत्रालय बस कुछ किलोमीटर की दूरी पर हैं। हालांकि, अब इस जगह को डिनोटिफाई कर दिया गया है। अब ऐसे में एक और सवाल उठता है कि दूसरे धरना स्थलों की दूरी जंतर मंतर से कितनी दूर है।
यदि जंतर मंतर से तीनों धरन स्थलों की दूरी नापे तो इनमें रामलीला मैदान सबसे ज्यादा नजदीक है। जंतर मंतर से रामलीला मैदान की दूरी करीब 3 से 3.2 किलोमीटर दूर है।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ के हिसाब से तय किए गए धरना स्थल
जंतर-मंतर संसद मार्ग पर स्थित है। यहां से बुराड़ी मैदान यानी मॉडल टाउन की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। वहीं, शाहदरा स्थित सीबीडी ग्राउंड जंतर-मंतर से लगभग 11 से 12 किलोमीटर दूर है। इन स्थानों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित करके दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों के दौरान होने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने की व्यवस्था की है। इससे अलग-अलग संख्या में जुटने वाले प्रदर्शनकारियों को उनकी क्षमता के अनुसार जगह दी जा सकेगी।
रामलीला और बुराड़ी मैदान में पहले भी हो चुके हैं बड़े आंदोलन
दिल्ली में रामलीला मैदान और बुराड़ी मैदान में प्रदर्शन होना कोई नई बात नहीं है। ये दोनों स्थान पहले भी कई बड़े आंदोलनों के केंद्र रहे हैं। रामलीला मैदान ने देश के कई ऐतिहासिक आंदोलनों को देखा है। इनमें 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सत्याग्रह से लेकर आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण (जेपी) के आंदोलन और 2011 में अन्ना हजारे के जन लोकपाल आंदोलन तक शामिल हैं। किसान आंदोलन के दौरान भी इस मैदान का इस्तेमाल हुआ है।
इसी तरह, बुराड़ी मैदान में 2020-21 के दौरान किसानों का बड़ा आंदोलन हुआ था। इसके अलावा भी यहां दिल्ली के कई छोटे-बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने इन स्थानों को पहले से ही धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित कर रखा है। प्रदर्शन स्थलों का चयन वहां जुटने वाली संभावित भीड़ और उपलब्ध क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाता है।
1,000 से लेकर 50 हजार से ज्यादा लोगों के लिए अलग-अलग जगह
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों को वहां जुटने वाली भीड़ के आधार पर बांटा है। जंतर-मंतर पर करीब 1,000 लोगों तक के प्रदर्शन की क्षमता निर्धारित की गई है। हालांकि, हाल के दिनों में यहां हुए प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी सामने आई है।
वहीं, अगर किसी प्रदर्शन में 1,000 से लेकर 50 हजार तक लोगों के शामिल होने की संभावना है, तो उसके लिए रामलीला मैदान निर्धारित किया गया है। इससे भी ज्यादा भीड़ जुटने की आशंका होने पर बुराड़ी मैदान का विकल्प रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बड़े प्रदर्शनों को सीमित जगहों पर केंद्रित करने के बजाय निर्धारित स्थलों पर आयोजित कराना है, ताकि यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
प्रदर्शन से पहले लेनी पड़ सकती है पुलिस की अनुमति
इन निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन करने के लिए भी दिल्ली पुलिस की अनुमति लेना जरूरी हो सकता है। कई बार आयोजक पुलिस को कार्यक्रम की सूचना देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, लेकिन हर मामले में केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं होता। प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या, कार्यक्रम की प्रकृति और सुरक्षा व्यवस्था जैसे पहलुओं के आधार पर पुलिस की अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए किसी भी बड़े प्रदर्शन की योजना बनाने से पहले संबंधित अधिकारियों से जरूरी अनुमति और शर्तों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।
Created On :   12 Oct 2026 8:13 PM IST












