प्राइवेट मेंबर बिल: अपने ही पेश किए बिल की वजह से BJP में शामिल नहीं हो पाते राघव चड्ढा! अगर पास हो जाता ये बिल, 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर लग जाता बैन

अपने ही पेश किए बिल की वजह से BJP में शामिल नहीं हो पाते राघव चड्ढा! अगर पास हो जाता ये बिल, 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर लग जाता बैन
आम आदमी पार्टी से राजनीतिक करियार की शुरुआत करने वाले राघव चड्ढा अब बीजेपी के हो गए हैं। हाल ही में उन्होंने आप के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी का दामन थामा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी से पॉलिटिक्स में कदम रखने वाले राघव चड्ढा पार्टी में अनबन के चलते बीजेपी में शामिल हो गए। हाल ही में उन्होंने आप के दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी का दामन थामा है। बीजेपी ज्वाइन करने के लिए राघव चड्ढा ने संविधान और नियमों का हवाला दिया था। आम आदमी पार्टी के विरोध के बावजूद राज्यसभा सचिवालय ने उन्हें विलय के लिए मान्यता दे दी है।

4 साल पहले राघव चड्ढा ने पेश किया था प्राइवेट मेंबर बिल

राज्यसभा सचिवालय ने डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता को बीजेपी सांसदों की लिस्ट में शामिल कर दिया है।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आज से चार साल पहले राघव चड्ढा ने संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था। अगर यह बिल पास हो जाता तो राघव चड्ढा और बाकी के आप सांसद के साथ बीजेपी में शामिल नहीं हो पाते।

दरअसल, साल 2022 में संसद के मानसून सत्रा के दौरान राज्यसभा में राघव चड्ढा ने संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया था। इस संविधान (संशोधन) विधेयक 2022 के तहत मुख्य रूप से दल-बदल विरोधी कानून (दसवें सूची) को और सख्त बनाने से जुड़ा गया था। विधेयक में दल-बदल के आधार पर अयोग्य ठहराए गए सांसद या विधायक को 6 साल तक चुनाव लड़ने से रोके जाने के प्रस्ताव थे। पार्टी व्हिप के बावजूद 7 दिन तक पेश नहीं होने पर इसे स्वेच्छा से सदस्यता छोड़ना माना जाए। व्हिप को सिर्फ विश्वास प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव तक सीमित रखा जाए। पार्टी में शामिल होने के लिए संख्या दो-तिहाई से बढ़ाकर तीन-चौथाई होनी चाहिए। साथ ही स्पीकर/चेयरमैन को 30 दिन (अधिकतम 3 महीने) के अंदर फैसला करना होगा।

दो-तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा

मालूम हो कि, राघव चड्ढा मौजूदा कानून के तहत पर दो तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए हैं। बता दें, इस बिल में राघव चड्ढा ने कहा था कि देश में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' और 'हॉर्स ट्रेडिंग' लोकतंत्र के लिए जोखिम बन गया है। उन्होंने तर्क दिया था कि मौजूदा कानून में कमियों की वजह से निर्वाचित प्रतिनिधि जनादेश के विपरीत जाकर राजनीतिक फायदा उठाते हैं।

Created On :   27 April 2026 3:24 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story