बिहार छात्र आंदोलन को लेकर बवाल: क्या छात्र आतंकवादी थे? पुलिस के AK-47 चलने पर प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

क्या छात्र आतंकवादी थे? पुलिस के AK-47 चलने पर प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
बिहार में छात्र आंदोलन में उस वक्त हिंसक हो गया, जब पुलिस ने AK47 बंदूक का इस्तेमाल किया। बिहार पुलिस की इस कार्रवाई पर विपक्ष राज्य से लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर ले रहा है।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में छात्र आंदोलन में उस वक्त हिंसक हो गया, जब पुलिस ने AK47 बंदूक का इस्तेमाल किया। बिहार पुलिस की इस कार्रवाई पर विपक्ष राज्य से लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर ले रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान वायनाड सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी आतंकवादी थे, जिनके खिलाफ बंदूकें और एके-47 जैसे हथियारों की जरूरत पड़ गई। प्रियंका ने कहा कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर रही है और इस मामले में जवाब देना चाहिए।

विपक्ष ने उठाया बिहार में छात्रों पर AK47 फायरिंग का मुद्दा

प्रियंका गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के परिवारों को फोन कर उन पर आंदोलन से दूर रहने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराने की कोशिश करनी चाहिए।

कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हुए कहा कि बिहार में प्रदर्शनकारियों के बीच एके-47 और दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किस स्तर से दिया गया, इसकी जानकारी सरकार को देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को संसद में आकर पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की निंदा

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस के पास चरणबद्ध प्रक्रिया होती है। पहले निषेधाज्ञा की जानकारी दी जाती है, फिर जरूरत पड़ने पर वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं। गोलीबारी या अत्यधिक बल का इस्तेमाल केवल बेहद गंभीर परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

उन्होंने बिहार की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई पुलिसकर्मी एके-47 लेकर छात्रों के पीछे दौड़ता दिखाई देता है तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि बिना स्पष्ट आदेश के बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की मांग की।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने दिल्ली और बिहार की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के दौरान कीलों का इस्तेमाल किया गया और पैलेट गन चलाई गई, जबकि बिहार में छात्रों के खिलाफ एके-47 दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना होगा कि इस तरह की कार्रवाई के आदेश किसने दिए।

Created On :   27 July 2026 5:34 PM IST

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