विधानसभा चुनाव 2026: बिजनी में निर्दलीय उम्मीदवार का रहता है दबदबा, कांग्रेस 4 बार और बीजेपी 1 बार जीत चुकी है चुनाव

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1951 में स्थापित बिजनी विधानसभा चिरांग जिले में स्थित एक अनारक्षित विधानसभा सीट है, बिजनी में अब तक 15 विधानसभा चुनाव हुए है। इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे अधिक 5 बार ,कांग्रेस ने 4 बार , बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) ने दो बार , प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, प्लेन ट्राइबल्स काउंसिल ऑफ असम और BJP ने एक-एक बार यहां जीत दर्ज कर चुकी है। 2023 के परिसीमन के बाद से इस सीट का सियासी गणित ही बदल गया। तब आबादी में बड़ा बदलाव हुआ।
यह भी पढ़े -बिहपुरिया में बीजेपी -कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला, पिछले दो चुनाव में बीजेपी ने जीते चुनाव
परिसीमन से पहले यहां 25 फीसदी के साथ मुस्लिम मतदाता सर्वाधिक थे। उसके बाद 24 फीसदी एसटी और 14 फीसदी एससी वोटर्स है। परिसीमन के बाद बिजनी में मुस्लिम का प्रभुत्व कम हो गया। जिसका असर आने वाले 2026 के विधानसभा चुनावों पर दिखाई पड़ेगा। निर्वाचन क्षेत्र धान की खेती, जूट की खेती और अन्य कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त है, लेकिन इलाके को मौसमी बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है।
2006 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना पहला चुनाव जीत चुके कमल सिंह नारजरी ने, 2011 ,2016 में BPF कैंडिडेट के तौर पर चुनाव जीता। 2021 में अजय कुमार राय ने BJP प्रत्याशी के तौर जीत हासिल की, जो बीजेपी की इस असेंबली पर पहली जीत थी।
2023 के परिसीमन को लेकर विपक्षी दलों, मुख्य रूप से AIUDF, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU), कांग्रेस और अन्य दलों, ने चुनाव आयोग पर चुनावी सीमाओं में हेरफेरी जैसा गंभीर आरोप लगाया। मुस्लिम मतदाता कम निर्वाचन क्षेत्रों में समेट गए, जिससे चुनावी क्षेत्र का डेमोग्राफिक समीकरण बदल गए। मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव कमजोर हुआ, जबकि ST और अन्य समूहों का प्रभाव बढ़ा है। इसका असर 2026 के चुनावों में साफ दिखाई देगा। जानकारों का कहना है कि परिसीमन का फायदा बीजेपी और उसके सहयोगी को मिलने की उम्मीद है। हालांकि इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेकिन बिजनी सीट को अपने पास बनाए रखने के बीजेपी प्रयासरत है।
Created On :   28 March 2026 4:41 PM IST












