यूपी एमएलसी चुनाव 2026: पश्चिम में बीजेपी का दबदबा, पूर्वांचल में सहयोगियों का साथ नहीं आया काम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा ने 6 और सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की। क्षेत्रवार नतीजों की बात की जाए तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बढ़त मिली, जबकि पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में पार्टी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने बीजेपी के सहयोगी दलों की भूमिका और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में समर्थन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। वैसे तो MLC चुनाव में शिक्षक और ग्रेजुएट वोटर्स की भूमिका विधानसभा और लोकसभा चुनावों से अलग होती है। इन चुनावों में जातीय समीकरणों के साथ शिक्षा, रोजगार, शिक्षकों की समस्याएं, उम्मीदवार की छवि और संगठनात्मक संपर्क भी मायने रखते हैं।
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सहयोगी दलों का प्रभाव कितना ?
पश्चिमी यूपी में बीजेपी की चार सीटों पर जीत में RLD के सहयोग को एक संभावित कारक माना जा रहा है। दूसरी ओर, पूर्वांचल में वाराणसी की दोनों सीटों पर हार के बाद सुभासपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कुल मिलाकर, इन नतीजों में पश्चिमी यूपी में BJP की बढ़त और पूर्वांचल, अवध तथा बुंदेलखंड में सपा की सफलता स्पष्ट दिखाई देती है। चुनाव परिणाम यह भी संकेत देते हैं कि शिक्षक और ग्रेजुएट वोटर्स के बीच सहयोगी दलों का पारंपरिक सामाजिक प्रभाव अपने आप चुनावी जीत में नहीं बदलता।
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पश्चिमी यूपी में बीजेपी ने जीतीं 4 सीटें
पश्चिमी यूपी की 5 सीटों में से 4 भाजपा के खाते में गईं, जबकि आगरा शिक्षक सीट पर सपा ने जीत दर्ज की। आगरा शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी रहे। मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों और आगरा स्नातक सीट से बीजेपी के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह जीते।
पश्चिमी यूपी में बीजेपी की सफलता के पीछे पार्टी के अपने संगठन के साथ राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के सहयोग को भी एक मुख्य वजह माना जा रहा है। जाट और किसान बहुल क्षेत्रों में आरएलडी के संगठनात्मक नेटवर्क से बीजेपी उम्मीदवारों को समर्थन जुटाने में मदद मिलने की चर्चा है। हालांकि, एमएलसी चुनाव में शिक्षकों और स्नातकों के मुद्दे, उम्मीदवारों की छवि और वैचारिक जुड़ाव भी अहम भूमिका निभाते हैं।
पूर्वांचल में बीजेपी को झटका
पूर्वांचल की तीन सीटों में से बीजेपी केवल गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट जीत सकी। यहां बीजेपी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की। वहीं, वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव और वाराणसी स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा विजयी रहे।
इन नतीजों के बीच बीजेपी के सहयोगी दलों सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), अपना दल (एस) और निषाद पार्टी की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद अपने-अपने प्रभाव वाले सामाजिक वर्गों में समर्थन का दावा करते रहे हैं। हालांकि सहयोगी दलों का प्रभाव बीजेपी उम्मीदवारों की जीत में किस हद तक काम आया, इसे केवल नतीजों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
अवध और बुंदेलखंड में भी सपा को सफलता
बुंदेलखंड से जुड़ी इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर भी सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने बीजेपी प्रत्याशी को हराया। इस तरह पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड की छह सीटों में बीजेपी को दो, जबकि सपा को चार सीटें मिलीं।
अवध क्षेत्र की दो सीटों पर बीजेपी और सपा को एक-एक सीट मिली। लखनऊ शिक्षक सीट पर बीजेपी के उमेश द्विवेदी ने जीत दर्ज की, जबकि लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह पटेल विजयी रहीं।
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