पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: मालदा में बीजेपी की जीत की रणनीति वाममोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की मजबूती

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। 1951 में स्थापित मालदह विधानसभा सीट को मालदा भी कहा जाता है। अब तक 18 बार चुनाव हो चुके है,1972 में तत्कालीन विधायक ने मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे के लिए सीट खालने से यहां उपचुनाव हुआ। मालदा में करीब 29% अनुसूचित जाति, 25 फीसदी मुस्लिम मतदाता, 10 फीसदी एसटी वोटर्स है। शहर की तुलना में अधिकाश वोटर्स ग्रामीण है। जमीन समतल और उपजाऊ होने की वजह से यहां की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, लेकिन हर साल इलाके को बारिश और बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है। यहां एक इंग्लिश बाजार भी है। बौद्ध परंपरा से जुड़े कई खंडहर और मठ यहां मौजूद है।
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मालदा पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण शहर है। भारत के प्रसिद्ध राजनेता ए.बी.ए. गनी खान चौधरी, जिन्हें प्यार से 'बरकतदा' कहा जाता है, का नाता इसी क्षेत्र से था। ये इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में रेलवे मंत्री रहे , इस दौरान इन्होंने मालदा को एक बड़ा रेलवे जंक्शन बनाने में अहम भूमिका निभाई। मालदा स्वादिष्ट फजली आमों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग ही पहचान है।
मालदा जिला (विशेषकर जगजीवनपुर) 9वीं शताब्दी के पाल साम्राज्य के राजा महेंद्रपाल के शासनकाल में समय का एक प्रमुख बौद्ध केंद्र रहा है, जहां नंददीर्घी महाविहार स्थित है,जो प्रमुख बौद्ध शिक्षण केंद्र था। खुदाई में बुद्ध की प्रतिमाएँ, टेराकोटा पट्टिकाएँ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें मिली हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध बौद्ध विरासत को दर्शाती हैं। जगजीवनपुर में 1995 में खुदाई के दौरान बौद्ध विहार के कई अवशेष मिले थे। पाल वंश के दौरान मालदा क्षेत्र में बौद्ध धर्म का काफी प्रभाव था, जो बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र में तालाब की खुदाई के दौरान भी बुद्ध की प्राचीन मूर्तियों के मिलने की रिपोर्ट सामने आई है, जो यहां की छिपी हुई ऐतिहासिक विरासत को प्रमाणित करती है।
यहां 11 बार चुनाव जीतकर कांग्रेस सबसे आगे है। 6 बार CPI ने जीती। दोनों ही राजनीतिक पार्टियों का दबदबा कुछ सालों से कम हुआ है। CPI ने आखिरी बार 2011 में और कांग्रेस ने 2016 में असेंबली इलेक्शन जीता था। 2021 में बीजेपी की जीत हुई थी। 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ चुनाव मैदान में उतरी है, यहां भाजपा की यही रणनीति है कि वाममोर्चा और कांग्रेस का गठबंधन टीएमसी के वोट काटे, जिसका फायदा बीजेपी को मिल सके।
Created On :   31 March 2026 2:00 PM IST












