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कांग्रेस का कायाकल्प: महासचिव पद से हटाए गए बदलाव की चिट्ठी लिखने वाले आजाद, CWC में इन नेताओं को मिली जगह 

September 12th, 2020 01:05 IST
कांग्रेस का कायाकल्प: महासचिव पद से हटाए गए बदलाव की चिट्ठी लिखने वाले आजाद, CWC में इन नेताओं को मिली जगह 

​डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लेटर बम के बाद कांग्रेस पार्टी के कायाकल्प की शुरुआत हो गई है। इसके तहत कांग्रेस की अं​तरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज (शुक्रवार, 11 सितंबर) गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फैलेरियो को कांग्रेस महासचिव पद से हटा दिया गया है। इनमें से गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने सोनिया को चिट्ठी लिखी थी। दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि ये बदलाव राहुल की ताजपोशी का रास्ता साफ करने के लिए किए गए हैं, क्योंकि चिट्ठी लिखने वाले नेता लीडरशिप में बदलाव चाहते थे। 7 अगस्त को लिखी गई चिट्‌ठी में ‘फुल टाइम लीडरशिप’ की मांग की गई थी, जो ‘फील्ड में एक्टिव रहे और उसका असर भी दिखे’।

कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि फुलटाइम लीडरशिप और फील्ड में असर दिखाने वाली एक्टिवनेस जैसे शब्दों का इस्तेमाल इस तरफ इशारा कर रहा था कि कांग्रेस का एक गुट दोबारा राहुल गांधी की ताजपोशी नहीं चाहता था। इसी ‘लेटर बम’ के बाद सोनिया गांधी ने अब संगठन में बड़े बदलाव कर दिए हैं। कांग्रेस ने पत्र विवाद के बाद 24 अगस्त को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में बनी सहमति के बाद एक छह सदस्यों वाली विशेष समिति भी गठित की है। यह समिति पार्टी के संगठन और कामकाज से जुड़े मामलों में सोनिया गांधी का सहयोग करेगी। इस विशेष समिति में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला को शामिल किया गया है। सुरजेवाला और तारिक अनवर को पार्टी के नए महासचिव नियुक्त किया गया है। 

ये हैं 9 महासचिव और 17 प्रभारी
कांग्रेस ने 9 महासचिव और 17 प्रभारी रखे हैं। इनमें जहां कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं बदली है। वहीं कुछ पुरानों को हटाकर नयों का लाया गया है, जबकि कुछ के प्रभार बदले गए हैं। महासचिवों में मुकुल वासनिक, हरीश रावत, ओमन चांडी, प्रियंका गांधी, तारिक अनवर, रणदीप सुरजेवाला, जीतेंद्र सिंह, अजय माकन और केसी वेणुगोपाल हैं। हरीश रावत से असम की जिम्मेदारी लेकर पंजाब दे दिया गया, जबकि वासनिक से तमिलनाडु और पुद्दुचेरी जैसे प्रभार लेकर उन्हें मध्यप्रदेश दिया गया। अभी तक वह अतिरिक्त प्रभार देख रहे थे। इनमें चाैकाने वाले नाम तारिक अनवर और सुरजेवाला रहे, जिन्हें क्रमश: केरल-लक्षद्वीप एवं कर्नाटक जैसे अहम राज्य दिए गए।

इन नेताओं को मिला राज्यों का प्रभार
वहीं दूसरी तरफ प्रभारियों में रजनी पाटिल, पीएम पुनिया, आरपीएम सिंह, शक्ति सिह गोहिल, राजीव सातव, राजीव शुक्ला, जितिन प्रसाद, दिनेश गुंडूराव, माणिकम टैगोर, चेल्ला कुमार, एच के पाटिल, देवेंद्र यादव, विवेक बंसल, मनीष चतरथ, भक्त चरणदास और कुलजीत नागरा शामिल हैं। इनमें रजनी पाटिल, पुनिया, सातव, गोहिल जैसे नेता पहले से प्रभारी रहे हैं। पाटिल से हिमाचल का प्रभार लेकर उन्हें जम्मू कश्मीर दे दिया गया। गौरतलब है कि प्रभारियों की लिस्ट में तमाम नाम ऐसे हैं, जो राहुल के पिछले कार्यकाल में प्रदेशों के प्रभारी सचिव का कामकाज देख चुके हैं।

दिग्विजय की 2 साल बाद CWC में वापसी
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की कांग्रेस वर्किंग कमेटी में दो साल बाद वापसी हुई है। वहीं, हाल ही में राजस्थान में पार्टी से बगावत कर चुके सचिन पायलट को अभी कूलिंग ऑफ पीरियड में रखा गया है। उन्हें पार्टी में क्या जिम्मेदारी दी जाए, इसका फैसला बाद में होगा।

राहुल के लिए रास्ता साफ कैसे, इसे इस तरह समझें

  • CWC की बैठक में ही मिल गए थे संकेत- 23 नेताओं की चिट्‌ठी की टाइमिंग पर राहुल ने सवाल उठाया था और कथित तौर पर कहा था कि यह भाजपा की मिलीभगत से हुआ। इस पर गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने खुलकर विरोध किया। हालांकि, बाद में सिब्बल ने अपना ट्वीट और आजाद ने अपना इस्तीफे वाला बयान वापस ले लिया।
  • बैठक में ही बैकफुट पर कर दिए गए थे चिट्ठी लिखने वाले- सवाल उठता है कि जब राहुल के बयान के बारे में पार्टी नेता कन्फर्म ही नहीं थे, तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी क्यों जाहिर की? दरअसल, सीडब्ल्यूसी की बैठक में 51 नेता शामिल हुए, लेकिन इनमें सोनिया को चिट्‌ठी लिखने वाले नेताओं की संख्या सिर्फ 4 थी। उन्हें बैकफुट पर कर दिया गया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार बिखराव रोकने और डैमेज कंट्रोल के तहत इन नेताओं से बयान वापस लेने को कहा गया। अंबिका सोनी जैसे कुछ नेताओं ने सोनिया से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर डाली।
  • अध्यक्ष पद पर आगे क्या होगा?- सोनिया गांधी अभी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि अगले साल की शुरुआत में पंजाब या छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सत्र होगा। इसमें राहुल गांधी को दोबारा अध्यक्ष चुना जाना तय है।

कांग्रेस में फेरबदल पर चिट्ठी कांड का असर
इस पूरे बदलाव में चिठ्ठी कांड ने अहम भूमिका निभाई। जहां चिठ्ठी लिखने वाले कुछ चेहरों का कद कम किया गया, वहीं दूसरी ओर कई चेहरे ऐसे थे, जिनमें असंतोष दिखाने के बाद भी भरोसा दिखाया गया। वासनिक और जितिन प्रसाद इस श्रेणी में आते हैं जबकि चिठ्ठी लिखने वाले आजाद, आनंद शर्मा को सीडब्ल्यूसी में रखा गया। इन असंतुष्टों में शामिल अरविंदर सिंह लवली को सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी की जिम्मेदारी दी गई। बदली हुई सीडब्ल्यूसी में 22 सीडब्ल्यूसी सदस्य, 26 परमानेंट इनवाइटीज और नौ स्पेशल इनवाइटीज हैं।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।