संसद मानसून सत्र समाप्त: विपक्ष ने केंद्र सरकार पर किया तीखा हमला, केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब, राहुल गांधी की भाषा पर क्या बोले?

विपक्ष ने केंद्र सरकार पर किया तीखा हमला, केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब, राहुल गांधी की भाषा पर क्या बोले?
संसद का मानसून सत्र गुरुवार (13 अगस्त) को खत्म हो गया है। इसके बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला किया है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार (13 अगस्त) को खत्म हो गया है। इसके बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला किया है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे सत्र के दौरान उसने अपना रुख बदला है, इसमें खासकर कांग्रेस का नाम लिया है। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी की भाषा पर भी टिप्पणी की है।

नीट पेपर लीक चर्चा पर क्या बोले?

इस सत्र के पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। इसका जिक्र करते हुए मेघवाल ने कहा कि इसमें विपक्ष ने पहले नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाया था और तत्काल इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए चर्चा की मांग की थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई तो विपक्ष ने अपना रुख बदल लिया। उन्होंने आगे तर्क देते हुए कहा कि इस मामले में सिर्फ चर्चा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए।

उनका कहना है, "किसी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने ध्यान को दूसरी ओर मोड़ दिया। उनके बीच अंदरूनी कलह भी होने लगी। उदाहरण के लिए सपा राम मंदिर में चढ़ावे के संबंध में कथित अनियमितताओं पर चर्चा करना चाहती थी, जबकि कांग्रेस ने छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे को प्राथमिकता दी।"

राहुल गांधी के भाषा पर दी प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "वे वास्तव में चर्चा नहीं चाहते थे। वे हंगामा चाहते थे। उन्होंने गृह मंत्री को इंतजार कराया। इसका तात्पर्य यह है कि वे स्वयं चर्चा नहीं चाहते थे।"

इसके अलावा उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषा का जिक्र करते हुए बताया, "राहुल गांधी की भाषा न तो संयमित है, न ही गरिमापूर्ण। लोकसभा में बोलते समय भी वे तरह-तरह की बातें करते हैं। इसीलिए कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता। आरोप लगाना, झूठ बोलना और फिर भाग जाना उनके चरित्र का हिस्सा बन गया है। वे कभी चर्चा नहीं चाहते थे। यह उनका काम करने का तरीका बन गया है। देखिए वे नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितना बोलते हैं। वे यह सब ठीक-ठीक इसलिए कह पाते हैं क्योंकि बोलने की आजादी उन्हें ही मिली हुई है। युवा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। वास्तव में पिछले 12 वर्षों में युवाओं के लिए किए गए कार्यों की सूची लेकर बैठ जाना चाहिए। राहुल गांधी को वह सूची लेकर बैठ जाना चाहिए। उनका दावा है कि कुछ भी नहीं किया गया है। 'झूठ बोलो और भाग जाओ' यह उनका विशिष्ट गुण बन गया है। इसीलिए इस बार सदन नहीं चल सका।"

Created On :   13 Aug 2026 11:23 PM IST

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