विधानसभा चुनाव 2027: बीजेपी का देंगे साथ!, शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का गठबंधन को लेकर बड़ा बयान, आप-कांग्रेस से बनाई दूरी

बीजेपी का देंगे साथ!, शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का गठबंधन को लेकर बड़ा बयान, आप-कांग्रेस से बनाई दूरी
शिअद प्रमुख ने कांग्रेस और आप को पंजाब का दुश्मन बताया। उन्होंने आगे कहा कि इन दोनों पार्टियों के अलावा बाकी दलों के लिए अकाली दल के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका ये बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे और अबकी बार पंजाब में एनडीए गठबंधन की सरकार बनाने के दावे के एक दिन बाद आया है। शिअद चीफ का ये बयान सियासत मे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज पंजाब गवर्नर गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम भगवंत मान को पद से हटाने की मांग की। राज्यपाल से मुलाकात के बाद बादल ने अपनी पार्टी को एक क्षेत्रीय पार्टी बताते हुए कहा उसका मुख्य उद्देश्य पंजाब की बेहतरी के लिए काम करना है। उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी सत्ता में रहे या विपक्ष में, पंजाब के हितों के लिए संघर्ष करती रहेगी। अकाली दल की राजनीति राज्य के लोगों और उनके हितों से जुड़ी हुई है।

उनके बयान के बाद पंजाब की राजनीति में गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का गठबंधन को लेकर कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़कर अन्य किसी समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन करने को तैयार है। इस दौरान शिअद प्रमुख ने कांग्रेस और आप को पंजाब का दुश्मन बताया। उन्होंने आगे कहा कि इन दोनों पार्टियों के अलावा बाकी दलों के लिए अकाली दल के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

आपको बता दें पंजाब की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल शिरोमणि अकाली दल ने 2022 का विधानसभा चुनाव, BSP के गठबंधन में लड़ा था। हालांकि और BJP से उसके रिश्तों का इतिहास काफी पुराना है, शिअद को बीजेपी का संस्थापक सहयोगी दल माना जाता है। SAD का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कई दशकों तक चला, लेकिन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में पार्टी ने NDA सरकार से नाता तोड़ लिया। इसके बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले जून 2021 में अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ गठबंधन किया। और 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 117 विधानसभा सीटों में से शिरोमणि अकाली दल ने 97 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि BSP ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। अकाली दल ने 3 सीटें जीतीं। जबकि BSP को 1 सीट मिली। इस विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई।

अकाली दल का BJP के साथ रिश्ता

दोनों दलों का रिश्ता लंबे समय तक गठबंधन और सत्ता में साझेदारी का रहा।

1967- अकाली दल ने BJP के पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनसंघ के साथ राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

1997- पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा।

2007 और 2012 गठबंधन ने पंजाब में सरकार बनाई।

2017- दोनों दलों ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

2019- लोकसभा चुनाव में दोनों दल साथ थे।

सितंबर 2020-तीन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा और शिअद ने NDA छोड़ा

केंद्र सरकार ने भारी विरोध के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया। आपको बता दें शिरोमणि अकाली दल को BJP के सबसे पुराने सहयोगियों में गिना जाता था। सितंबर 2020 में उसने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में NDA से अलग होने का फैसला किया। उस समय पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल थे।

अकाली दल के कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर केंद्र की NDA सरकार में मंत्री पद संभाले

प्रकाश सिंह बादल- मोरारजी देसाई सरकार में संचार तथा कृषि एवं सिंचाई मंत्री

सुरजीत सिंह बरनाला- केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री; 1998–99 में रसायन एवं उर्वरक तथा खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों से जुड़े विभाग

सुखदेव सिंह ढींडसा -अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रसायन एवं उर्वरक, खनन तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल सहित विभिन्न विभागों के मंत्री

हरसिमरत कौर बादल- नरेंद्र मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, 2014 से 2020 तक, कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफा दिया

2026 में पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चा तेजी से चल रही है। लेकिन केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सितंबर 2026 में गठबंधन ना होने की बात कही थी। कहा कि BJP फिलहाल अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। हालांकि इस दौरान पुरी ने कुछ शर्तों के साथ भविष्य में गठबंधन होने की बात से इनकार भी नहीं किया था। ऐसे में यदि एक बार फिर ये दोनों पुराने साथी दल साथ आते है तो पंजाब चुनाव की सूरत कुछ और हो सकती है। ये आने वाले नतीजे ही बताएंगे। लेकिन हालफिलहाल यदि दोनों दलों के बीच एक साथ आने की बात बनती है तो ये तय है कि मोदी कैबिनेट विस्तार में एक बार फिर शिअद के किसी नेता या सांसद हरसिमरत कौर को एक बार फिर मंत्री बनाया जा सकता है। इसके बदले पुरी की कैबिनेट मंत्रिमंडल से भी छुट्टी होने की उम्मीद अधिक है, क्योंकि हाल ही मे उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में भी कुछ उछला था। दूसरी बात ये भी है कि केंद्रीय मंत्री पुरी का अगले महीने राज्यसभा कार्यालय पूरा रहा है, उन्हें एमपी की राज्यसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में दोबारा से राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन फिर से पुरी को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिले इसकी संभावना बहुत ही कम है।

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