comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

राशिद रिजिजू को लिखने के लिए स्वतंत्र, हम बोर्ड के निर्णय से बंधे हैं : डीजीसी

June 10th, 2020 09:59 IST
राशिद रिजिजू को लिखने के लिए स्वतंत्र, हम बोर्ड के निर्णय से बंधे हैं : डीजीसी

हाईलाइट

  • राशिद रिजिजू को लिखने के लिए स्वतंत्र, हम बोर्ड के निर्णय से बंधे हैं : डीजीसी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली गोल्फ क्लब (डीजीसी) के अध्यक्ष आरएस बेदी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय गोल्फर राशिद खान ने क्लब में अभ्यास करने की मांग करने के लिए अभी तक क्लब से औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया है। बेदी ने साथ ही कहा कि इस मामले में खेल मंत्रालय को शामिल करने से राशिद को ज्यादा मदद नहीं मिलेगी क्योंकि क्लब अपने बोर्ड द्वारा किए गए फैसलों से बंधा हुआ है।

बेदी ने कहा, हम एक सेक्शन आठ कंपनी हैं, जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वे बोर्ड के प्रस्तावों के आधार पर होते हैं। आप बोर्ड प्रस्तावों को कैसे बदल सकते हैं? अगर वह उस रास्ते पर चलना चाहते हैं (खेल मंत्री को पत्र लिखना चाहते हैं) तो इसके लिए हम उन्हें शुभकामनाएं देना चाहते हैं।

विश्व रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर काबिज भारतीय गोल्फर राशिद ने इससे पहले कहा था कि अहम अभ्यास के लिए डीजीसी में प्रवेश नहीं मिलने के बाद अब वह केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू से मदद मांगने के लिए उन्हें एक पत्र लिखने के बारे में सोच रहे हैं।

राशिद और डीजीसी पिछले साल की शुरूआत से एक दूसरे से उलझे पड़े हैं। दो बार के एशियाई चैंपियन राशिद ने पिछले साल डीजीसी पर भेदभाव का आरोप लगाया था और कहा था कि डीजीसी निचले तबके से आने वाले गोल्फरों के करियर को बर्बाद कर रहा है।

बेदी ने कहा कि राशिद ने व्यक्तिगत रूप से अब तक डीजीसी से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, क्लब को अपने फैसले को पलटने पर विचार करने के लिए, एक गिरोह के लीडर होने के बजाय उन्हें व्यक्तिगत रूप में यहां आना होगा। यह हमारा उन्हें जवाब है। आप पहले खुद से बात करो फिर क्लब तर्क के आधार पर फैसला करेगा।

राशिद एशिया में 10वें स्थान से सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग वाले भारतीय गोल्फर हैं और वह विश्व रैंकिंग में भी 185वें स्थान से शीर्ष भारतीय हैं। वह भारत से ओलंपिक कोटा पाने वालों की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे कि तभी अंतर्राष्ट्रीयश गोल्फ महासंघ (आईजीएफ) ने कोविड-19 महामारी के कारण 15 मार्च को विश्व रैंकिंग स्थिर कर दी थी।

कमेंट करें
mGoiQ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।