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करोड़ों की भीड़ में भी तन्हा हैं रोनाल्डो

October 14th, 2019 17:00 IST
 करोड़ों की भीड़ में भी तन्हा हैं रोनाल्डो

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। पुर्तगाली सुपरस्टार फुटबालर क्रिस्टियानो रोनाल्डो दुनिया भर में कितने लोकप्रिय हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर उनके 38 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स या फिर यूं कहें चाहने वाले हैं। इन सबके अलावा पूरी दुनिया में करोड़ों ऐसे भी लोग हैं, जो रोनाल्डो को इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से इतर चाहते हैं। इसके बावजूद रोनाल्डो इतने अकेले हैं कि वह अपने निजी जीवन में सिर्फ चार लोगों पर भरोसा करते हैं।

पहले जानते हैं कि मैनचेस्टर युनाइटेड, रियल मेड्रिड और जुवेंतस जैसे अग्रणी क्लबों के लिए खेल चुके रोनाल्डो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कितने चाहने वाले हैं। इंस्टाग्राम की बात करें तो यहां रोनाल्डो के 18.6 फॉलोअर्स हैं। इसी तरह ट्विटर पर 8 करोड़, फेसबुक पर 12 करोड़ से अधिक और यूट्यूब पर 13.8 लाख लोग इन्हें फॉलो करते हैं। सिर्फ इंस्टाग्राम से रोनाल्डो को सालाना 4.4 करोड़ डॉलर की आय होती है।

रोनाल्डो काफी तंगी से निकलकर सुपरस्टार बने हैं। यही कारण है कि वह अपनी जिंदगी खुलकर जीते हैं। बिंदास जीते हैं। खेल के मैदान में करीब 700 गोल कर चुके रोनाल्डो मैदान के बाहर अपने प्रेम सम्बंधों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में एक ब्रिटिश पत्रकार से साक्षात्कार में रोनाल्डो ने यह कहकर दुनिया को चौंका दिया था कि मैदान में गोल करने से अच्छा उन्हें अपनी गर्लफ्रेंड जियोर्जिना रोड्रिगेज के साथ सेक्स करना लगता है।

रोनाल्डो ने अब तक शादी नहीं की है लेकिन चार प्रेमिकाओं से उनके चार बच्चे हैं। पिता जोस की 2005 में शराब के कारण मौत हो गई थी, इसलिए शराब नहीं पीते। चर्चा में रहना उन्हें आता है। कई बार अच्छे और कई बार बुरे कारणों से चर्चा में रहे हैं। कई बार मुश्किलों में घिरे हैं और निकले हैं लेकिन हाल में एक ऐसी मुश्किल ने रोनाल्डो को घेरा, जिससे निकलने के प्रयास में वह भावनात्मक रूप से टूट गए। मां कैंसर से उबरी हैं, लिहाजा वह उनसे कुछ शेयर नहीं कर सकते। पिता को छोटी उम्र में ही खो दिया था। ऐसे में उनके इर्द-गिर्द चुनिंदा लोग ही हैं जिन पर वह भरोसा कर सकते हैं।

रोनाल्डो खुद भरोसे के काबिल हैं क्योंकि 17 जून 2010 को जन्मे उनके बड़े बेटे की मां कौन है, यह सिर्फ रोनाल्डी ही जानते हैं। रोनाल्डो ने इस बच्चे की मां का नाम कभी जाहिर नहीं किया क्योंकि जूनियर को जन्म देने वाली महिला के साथ उन्होंने वादा किया था। अब सवाल यह है कि खुद रोनाल्डो कितने लोगों पर भरोसा करते हैं। ब्रिटिश टीवी प्रेजेंटर पियर्स मोर्गन के साथ साक्षात्कार में रोनाल्डो ने कहा कि वह सिर्फ चार लोगों पर भरोसा करते हैं।

हाल ही में खुद पर बलात्कार का आरोप लगने के बाद आईटीवी पर मोर्गन से मुखातिब रोनाल्डो ने कहा था कि वह इस आरोप से टूट गए हैं और खुद को काफी अकेला महसूस कर रहे हैं। रोनाल्डो ने कहा कि उनके निजी जीवन में कई ऐसे मौके आए, जब उन्हें लगा कि वह लोगों पर भरोसा नहीं कर सकते। रोनाल्डो ने कैथरीन मायोर्गा द्वारा बलात्कार के आरोपों को सिरे से खारिज किया लेकिन यह जरूर कहा कि इन तमाम घटनाओं ने उन्हें दुनिया से दूर किया है और वह भीड़ में भी अकेले हो गए हैं।

मिरर डॉट कॉम ने रोनाल्डो के हवाले से लिखा है, मैं जिन लोगों पर भरोसा करता हूं, उनके नाम नहीं बता सकता क्योंकि यह उनके साथ नाइंसाफी होगी, लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि वे सिर्फ चार लोग है। इन पर मैं 100 फीसदी भरोसा कर सकता हूं। मेरे इर्द-गिर्द कई करीबी दोस्त हैं, परिजन हैं लेकिन सही मायने में मेरे साथ सिर्फ चार लोग हैं। मेरे लिए यह जीवन की एक कड़वी सच्चाई है।

शोहरत की बुलंदियों पर रहने के बावजूद समय-समय पर सच्चाई का कड़वा घूंट पीने वाले रोनाल्डो ने हमेशा खुद को अपने चाहने वालों से जोड़े रखने का प्रयास किया। साल 2015 में रोनाल्डो ने 50 लाख पाउंड से अधिक रकम दान में दी। वह फोर्ब्स द्वारा 2019 में जारी दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की सूची में सालाना 10.9 करोड़ डॉलर की कमाई के साथ दूसरे नम्बर पर हैं। वह जहां भी जाते हैं लोग उनसे मिलने के लिए पागल हो जाते हैं लेकिन रोनाल्डो के लिए एक सच्चाई परछाई की तरह हमेशा उनके साथ रहती है और वह यह है कि वह करोड़ों की भीड़ में भी तन्हा हैं।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।