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मध्य प्रदेश: बिरसिंहपुर के थर्मल पाॅवर प्लांट के कूलिंग पोंड पर बनेगा नगरीय निकायों के लिए देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश शासन, उमरिया के संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट के कूलिंग पोंड पर देश का सबसे बड़ा सोलर पॉवर प्लांट करने जा रही है। मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। यह देश की किसी भी नगरीय निकायों (अर्बन लाेकल बॉडी-यूएलबी) को बिजली देने वाला एकमात्र पहला सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट है, जिसमें 220 मेगावॉट बिजली बनेगी। इसमें बिजली स्टोरेज (बैटरी स्टोरेज) भी होगा। इसकी लागत 1566 करोड़ है। इस प्लांट की 30 प्रतिशत राशि ग्रीन बॉन्ड से जुटाई जाएगी। साथ ही प्रति 100 करोड़ पर 18 करोड़ रुपए भारत सरकार से सब्सिडी मिलेगी। इस पर 300-400 करोड़ ही राज्य शासन को खर्च करना होगा। नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह प्रोजेक्ट नवाचार के तौर पर भी देखा जा रहा है। इसके लिए 500 करोड़ का म्यूनिसिपल बॉन्ड किया जाएगा। साथ ही ग्रीन फंडिंग के जरिए इसका क्रियान्वयन होगा। इस सोलर प्लांट के माध्यम से प्रदेश की नगरीय निकायों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाना है।
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इस प्लांट से नगरीय विकास एवं आवास विभाग सभी नगरीय निकायों को 15 साल तक 3.25 रुपए प्रति यूनिट बिजली देगा। वर्तमान में प्रदेश के सभी 413 नगरीय निकाय हर महीने 200 करोड़ रुपए बिजली बिल पर खर्च कर रहे हैं। जबकि प्रोजेक्ट पर ग्रीन बॉन्ड के जरिए 1500 करोड़ में तैयार किया जाएगा। फिलहाल प्रदेश के 180 नगरीय निकाय ऐसे हैं, जिनके पास बिजली के एचटी कनेक्शन है, ये सभी बिरसिंहपुर सोलर प्लांट से सीधे बिजली ले सकेंगे। बाद में शेष 233 नगरीय निकायों को भी इसी सोलर प्लांट से बिजली सप्लाय की जाएगी। इस प्लांट से पूर्वी मप्र क्षेत्र के नगरीय निकायों में ट्रांसमीशन शून्य करने का लक्ष्य रखा है।
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जमीन तलाशी, नहीं मिली तो फ्लोटिंग प्लांट तलाशा
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सोलर प्लांट लगाने के लिए अलग-अलग जगह जमीन का बड़ा चक तलाशा, लेकिन नहीं मिला। इतना बड़ा प्रोजेक्ट लगाने के लिए लगभग 400 हेक्टेयर जमीन की जरुरत थी, जो एकसाथ नहीं मिल पा रही थी। साथ ही जमीन अिधग्रहण के खर्चे और अिधग्रहण की लंबी प्रक्रियाओं के कारण जलाशय पर (फ्लोटिंग) सोलर प्लांट पर मंथन किया गया। इसके बाद बिरसिंहपुर के संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट के कूलिंग पोंड पर फ्लोटिंग सोलर साइट का चयन किया गया। सोलर प्लेट्स के मैंटेनेंस के लिए थर्मल प्लांट का वेस्ट वॉटर का उपयोग किया जाएगा। सोलर प्लेट्स से कूलिंग पोंड कवर होने से वाष्पीकरण भी घटने का अनुमान है।
इनका कहना
दुनिया के किसी भी नगरीय निकायों ने सोलर स्टोरेज पर इतना बड़ा कदम नहीं उठाया, जो मप्र शासन उठाने जा रही है। यह देश का सबसे बड़ा सोलर फ्लोटिंग पॉवर प्लांट होगा जो इतने नगरीय निकायों को बिजली देगा। इसमें राज्य शासन का 300-400 करोड़ रुपए ही खर्च होगा। प्रोजेक्ट का पर्यावरण, सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन हो चुका है। डीपीआर बनाई जा रही। टेंडर अवॉर्ड होने के बाद इसे 18 महीने में पूरा कर लेंगे।
Created On :   12 Jun 2026 9:30 PM IST






