मध्य प्रदेश: अब सरकारी अभियोजन अधिकारी पुलिस चालान को परीक्षण के नाम पर रोक नहीं सकेंगे

अब सरकारी अभियोजन अधिकारी पुलिस चालान को परीक्षण के नाम पर रोक नहीं सकेंगे
मध्य प्रदेश के पुलिस थानों द्वारा आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश करने के पूर्व उसे सरकारी अभियोजन अधिकारियों को परीक्षण के लिये सौंपा जाता है

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य सरकार के पुलिस थानों द्वारा आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश करने के पूर्व उसे सरकारी अभियोजन अधिकारियों को परीक्षण के लिये सौंपा जाता है जिससे इन्हें न्यायालय में प्रस्तुत करने में काफी विलम्ब होता है। लेकिन अब अभियोजन अधिकारी चालान को परीक्षण के लिये रोक कर नहीं रख सकेंगे।

राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत कार्यरत लोक अभियोजन संचालनालय के निदेशक बीएल प्रजापति ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये हैं। निर्देश में कहा गया है कि पुलिस चालान संबंधित मजिस्ट्रेट को प्रेषित करना थाना प्रभारी का अनिवार्य कर्तव्य है। उप संचालक अभियोजन द्वारा चालान की संवीक्षा केवल परामर्शदात्री एवं सुधारात्म है।

अभियोजन अधिकारी द्वारा चालान की संवीक्षा को न्यायालय में चालान पेश करने के लिये पूर्व शर्त नहीं बनाया जा सकता है और न ही अभियोजन अधिकारी को चालान रोकने या स्वीकृत करने का कोई वैधानिक अधिकार है। संवीक्षा के दौरान पाई गई कमियों का निराकरण कराना पुलिस विभाग के आंतरिक पर्यवेक्षी अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में आता है तथा कोर्ट में चालान प्रस्तुतीकरण की समय सीमा में अभियोजन स्तर से कोई प्रक्रियात्मक विलम्ब न हो।

Created On :   12 Jun 2026 11:19 PM IST

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