MP News: शिप्रा नदी को फिर से निर्मल और अविरल बनाने की तैयारी, जानिए मोहन यादव सरकार किन बड़े प्रोजेक्ट्स पर कर रही काम

शिप्रा नदी को फिर से निर्मल और अविरल बनाने की तैयारी, जानिए मोहन यादव सरकार किन बड़े प्रोजेक्ट्स पर कर रही काम
उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। खासकर सिंहस्थ महापर्व के दौरान इसकी अहमियत कई गुना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने पर काम कर रही है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। खासकर सिंहस्थ महापर्व के दौरान इसकी अहमियत कई गुना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सालभर जल से भरपूर बनाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रही है। नदी में गंदे पानी को रोकने से लेकर नए घाटों के निर्माण और जनभागीदारी तक, सरकार कई स्तरों पर प्रयास कर रही है।

शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

सरकार का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कान्ह डायवर्जन क्लोज्ड डक्ट प्रोजेक्ट है। इसे भारत की पहली 'रिवर बाईपास' भूमिगत परियोजना बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकना है।

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इस परियोजना के तहत करीब 30.15 किलोमीटर लंबी क्लोज्ड डक्ट बनाई जा रही है, जिसमें लगभग 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग शामिल है। इस सुरंग से दूषित पानी करीब 100 फीट नीचे होकर गुजरेगा, जिससे खेती और आसपास के क्षेत्रों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बाद में इस पानी को गंभीर बांध के डाउनस्ट्रीम की ओर ले जाकर उपचार (ट्रीटमेंट) के बाद सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को शिप्रा में अधिक स्वच्छ और प्राकृतिक जल उपलब्ध होगा।

नए घाट, बैराज और अविरल जलधारा पर भी फोकस

सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सरकार शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर करीब 29.15 किलोमीटर लंबे नए पक्के घाट बनवा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 150 से अधिक प्रवेश और निकास बिंदु (एक्सेस पॉइंट) विकसित किए जा रहे हैं। वहीं नदी में जल स्तर बनाए रखने के लिए 21 नए बैराज भी बनाए जा रहे हैं। अब तक 18.20 किलोमीटर लंबी रिटेनिंग वॉल और 7 किलोमीटर से ज्यादा घाट निर्माण का काम पूरा किया जा चुका है।

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इसके अलावा सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल संवर्धन परियोजना और नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना के जरिए शिप्रा में सालभर पानी का प्रवाह बनाए रखने की दिशा में भी काम चल रहा है। इससे उज्जैन संभाग के कई गांवों और कृषि क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने एक प्रशासनिक फैसला लेते हुए सभी सरकारी दस्तावेजों में नदी का नाम 'शिप्रा' लिखने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि इसका पारंपरिक और ऐतिहासिक नाम सुरक्षित रहे।

सिर्फ निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण का अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन के रामघाट पर श्रमदान कर चुके हैं और सफाई मित्रों का सम्मान भी किया है। सरकार का कहना है कि शिप्रा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने में आम लोगों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है, जितनी बड़ी परियोजनाएं।

Created On :   4 July 2026 5:33 PM IST

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