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दिग्विजय ने की पाक तानाशाह जिया-उल-हक से मोदी सरकार की तुलना

July 13th, 2018 16:31 IST

हाईलाइट

  • मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी एक नया मुद्दा छेड़ दिया है।
  • दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के तानाशाह जिया-उल-हक से मोदी सरकार की तुलना की है।
  • दिग्विजय ने कहा कि पाकिस्तान में जब जिया-उल-हक ने धार्मिक अतिवाद को बढ़ावा दिया, तो वहां आतंकवाद भी काफी बढ़ा है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव 2019 नजदीक आ रहे हैं, उसी रफ्तार में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव की दिशा कहीं ना कहीं अब विकास के मुद्दे से हटकर धार्मिक और देश प्रेम के मुद्दे की ओर भी मुड़ने लगी है। तभी तो एक ओर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत को हिंदू पाकिस्तान बनने की बात छेड़ी थी, तो वहीं अब मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी एक नया मुद्दा छेड़ दिया है।

दिग्विजय ने कहा कि पाकिस्तान की ही तरह भारत की सत्तासीन पार्टी भी अपने देश में कट्टरवाद को बढ़ावा दे रही है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि आतंकवाद की असली जड़ कट्टरपंथ ही होती है। कट्टरपंथ को बढ़ावा देना मतलब आतंकवाद को पैदा करना ही होता है।

दिग्विजय सिंह ने कहा- "कट्टरपंथ की वजह से आतंकवाद पैदा होता है। धार्मिक कट्टरवाद को जिया-उल-हक ने पाकिस्तान में प्रश्रय दिया था, जिसके कारण वहां आतंकवाद पैदा हुआ। भारत में भी सत्तासीन सरकार द्वारा तथाकथित 'हिन्दुत्व' के नाम पर धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो उतना ही खतरनाक है।"

दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के तानाशाह जिया-उल-हक से मोदी सरकार की तुलना की है। उन्होंने कहा कि अतिवाद से आतंकवाद का जन्म होता है। पाकिस्तान में जब जिया-उल-हक ने धार्मिक अतिवाद को बढ़ावा दिया, तो वहां आतंकवाद भी काफी बढ़ा है। कुछ वैसे ही भारत में धार्मिक अतिवाद को बढ़ावा देने में मौजूदा सरकार जुटी है और वो तथाकथित हिंदुत्व है और ये निश्चित तौर पर खतरनाक संकेत है।

गौरतलब है कि इससे पहले शशि थरूर भी हिंदुत्व और कट्टरपंथी के मुद्दे पर बयान देकर हंगामा कर चुके हैं। थरूर ने कहा था कि यदि भाजपा लोकसभा में इसी बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आई, तो हमारा संविधान नहीं बचेगा, क्योंकि तब वह लोकतांत्रिक संविधान जैसा हम समझते हैं, उसे नष्ट कर देगी और एक नया संविधान लिखेगी। उसके बाद वह हिंदू राष्ट्र बनाएगी, जिससे अल्पसंख्यकों की बराबरी का हक छिनेगा जैसा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होता है। इस तरह यह वह भारत नहीं रहेगा, जिसके लिए महात्मा गांधी, नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी।’

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