नागालैंड : सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम अफ्सपा को वापस लने की मांग पर गठित हुई कमेटी

December 27th, 2021

हाईलाइट

  • 45 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी

डिजिटल डेस्क, कोहिमा । नागालैंड से सशस्त्र बल(विशेष अधिकार)अधिनियम,1985 को वापिस लिए जाने की मांग पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है जो सरकार को 45 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मुख्यमंत्री नेफियो रियो ने रविवार को यह जानकारी दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 23 दिसंबर को नई दिल्ली में एक बैठक के बाद इस समिति का गठन किया था और इसमें नागालैंड के मुख्यमंत्री के अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व शर्मा, नागालैंड के उप मुख्यमंत्री वाई पाटोन और नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ )विधायक दल के नेता टी आर जिलियांग भी थे। इस बैठक में नागालैंड की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई और इस समिति के गठन का निर्णय लिया गया।

यह समिति केन्द्रीय गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर मामलों के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई है और यह अपनी रिपोर्ट 45 दिनों में सौंपेगी । समिति की अनुशंसा पर ही नगालैंड से अफ्सपा और अशांत क्षेत्र कानून की वापसी पर निर्णय होगा। इस समिति में नागालैंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ,असम रायफल्स के महानिरीक्षक (नागालैंड) और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के तौर पर शामिल हैं।

गौरतलब है कि नागालैंड के मोन जिले के ओटिंग क्षेत्र में चार दिसंबर को गलत पहचान के कारण सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत हो गई थी और इसके बाद से ही समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र से इस कानून को वापिस लिए जाने की जोरदार मांग उठी थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार सेना की यूनिट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए कोर्ट ऑफ इंकवायरी के आदेश दे दिए गए हैं और इस जांच के बाद ही उस घटना में सीधे तौर पर शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उस दिन 23 दिसंबर की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि ओटिंग की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय गृह मंत्री का धन्यवाद करते हुए रविवार को एक ट्वीट में कहा इस मामले को गंभीरता से लेने के लिए श्री अमित शाह का आभारी हूं और राज्य सरकार सभी वर्गों से शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील करती है।

नागालैंड विधानसभा ने 20 दिसंबर को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र खासकर नागालैंड से अफस्पा को हटाने की मांग की थी ताकि नागालैंड के राजनीतिक मामले का शांतिपूर्ण तरीेके से समाधान हो सके।

अफ्सपा कानून के तहत सेना और अन्य केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों को बिना किसी पूर्व नोटिस के किसी भी क्षेत्र में छापा मारने, अभियान चलाने, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने या गिरफ्तार करने का अधिकार है और यह कानून इम्फाल नगर पालिका परिषद क्षेत्र और अरूणाचल प्रदेश के कुछ जिलों को छोड़कर नागालैंड, असम, मणिपुर में लागू है।

 

(आईएएनएस)