चांदीवाल समिति के सामने पेशी : पेशी के दौरान वाझे ने की देशमुख पर सवालों की बौझार, पूछा- किसने की थी मेरी शिकायत 

January 21st, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई। चांदीवाल समिति के सामने पेशी के दौरान शुक्रवार को बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे ने राज्य के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ राकांपा नेता अनिल देशमुख के सामने कई सवाल दागे। पेशी के दौरान वाझे ने देशमुख से सवाल करने की इजाजत मांगी जिसे मंजूर कर लिया गया।   बता दें कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा देशमुख पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार ने बांबे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल की एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। वहीं देशमुख से सवाल जवाब के बाद वाझे के वकील ने समिति के सामने अर्जी देकर मामले में पूछताछ के लिए संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) मिलिंद भारंबे को भी गवाह के रुप में बुलाए जाने की मांग की है। आवेदन पर फैसला 24 जनवरी को होगा।

सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार की पेशी के दौरान समिति से इजाजत मिलने के बाद वाझे ने देशमुख से एक के बाद एक दर्जनों सवाल दागे। वाझे ने शुरूआत विधायक, मंत्री कब बने इससे की। इसके बाद वाझे ने देशमुख से गृहविभाग के कामकाज से जुड़े सवाल पूछे। इस दौरान वाझे ने देशमुख से परमबीर सिंह के पत्र के बाद बनाई गई समिति और 30 मार्च 2021 को जारी शासनादेश (जीआर) से जुड़े सवाल पूछे। वाझे ने पूछा कि क्या वे इस जीआर से जुड़े थे। इस पर देशमुख ने कहा कि सिंह का पत्र पढ़ने के बाद मैंने खुद मुख्यमंत्री से मामले की जांच की मांग की जिसके बाद समिति बनाई गई। देशमुख ने कहा कि जीआर की प्रति सार्वजनिक होने के बाद उन्हें इसकी जानकारी मिली। इसके अलावा खुद की बहाली से जुड़ा सवाल भी वाझे ने देशमुख से पूछा। वाझे ने सवाल किया कि आपको कब जानकारी मिली कि मुझे सीआईयू का प्रभारी बनाया गया है। जवाब में देशमुख ने कहा कि मुझसे किसी ने शिकायत की कि 14-15 साल के निलंबन के बाद वाझे को सीआईयू का प्रभारी बना दिया गया है। निलंबित अधिकारियों को बहाली के बाद साइट पोस्टिंग दी जाती है। लेकिन वाझे को सिर्फ एक दिन की साइड पोस्टिंग दी गई। सिंह के मौखिक आदेश के आधार पर वाझे को सीआईयू का प्रभारी बना दिया गया। तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संतोष रस्तोगी ने भी इसका विरोध किया था। वाझे ने एपीआई को यूनिट का प्रभारी बनाए जाने से जुडे नियम की जानकारी मांगी तो देशमुख ने कहा कि ऐसा कोई नियम होगा। वाझे ने पूछा कि उनको लेकर शिकायत किसने की थी तो देशमुख ने कहा कि उनसे मौखिक शिकायत की गई थी लेकिन शायद किसी ने लिखित शिकायत भी की हो। इसके अलावा भी वाझे ने अन्वय नाईक आत्महत्या की जांच, अधिकारियों के पदों में अंतर समेत कई सवाल पूछे।