दैनिक भास्कर हिंदी: यहां दो रंग का है समंदर, मिलने के बावजूद मिक्स नहीं होता पानी 

October 27th, 2018

डिजिटल डेस्क । हमारी दुनिया में उपस्थित महासागरों में न जाने कितने राज़ छुपे हुए हैं। शायद ही आपको इस बारे में पता हो कि इनके बारे में सिर्फ 20 प्रतिशत के आसपास ही जानकारी जुटाई जा सकी है, लेकिन हम आपको महासागरों के बारे में कुछ ऐसी खास जानकारी देने जा रहे हैं जिससे आपकी हैरानी बढ़ेगी। ये जानकारी हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बारे में है...हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर अलास्का की खाड़ी में मिलते हैं, लेकिन इनका पानी आपस में मिश्रित नहीं होता। जी हां ये सच है, दोनों महासागरों के आपस में मिलने के बावजूद इन का पानी आपस में नहीं मिलता। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है।


 क्या मानना है वैज्ञानिकों का?

अलास्का की खाड़ी में दोनों महासागरों के मिलने के बावजूद इनके पानी में साफ-साफ अंतर देखा जा सकता है। ग्लेशियर से निकलने वाले पानी का रंग नीला और महासागरों से आने वाला पानी गहरा नीला होता है। इसलिये ये अंतर आसानी से देखा जा सकता है। इन दोनों महासागरों पर हुयी कई बार की रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने बोला है कि इनके पानी के आपस में मिक्स न होने के पीछे का कारण खारे और मीठे पानी का घनत्व(Density), टेंपरेचर, और लवणता(Salinity) है।

इसके अलावा ये भी माना जाता है कि ग्लेशियर से बने सागर का पानी मीठा और समुद्र का पानी खारा होता है और जब ये दोनों महासागर मिलते हैं तो इस अंतर के कारण झाग की एक दीवार बन जाती है और अलग-अलग घनत्व के कारण ये दोनों सागरों का पानी आपस में मिल नहीं पाता। वहीं कुछ लोगों का मानना ये भी है कि जब विभिन्न घनत्व वाले पानी में सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो पानी का रंग बदलता है। इस वजह से दोनों सागरों के मिलने पर अलग-अलग रंग दिखायी देते हैं, जिसकी वजह से ऐसा लगता है कि दोनों का पानी आपस में मिक्स नहीं हो रहा है। ये भी माना जाता है कि इस घटना का सम्बन्ध पानी के वर्टिकल स्तरीकरण से होता है। कुछ लोग इसे चमत्कार तो कुछ इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़ कर भी देखते हैं। वैसे ऐसा नहीं है कि महासागरों का पानी कहीं न कहीं आपस मेम मिलता ही न हो।