दैनिक भास्कर हिंदी: बैलगाड़ी से निकली अनोखी बारात, बजाए गए पारंपरिक वाद्ययंत्र

April 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, बालाघाट। शादियों में बढ़ते दिखावे के बीच जहां एक ओर पारंपरिक शादियों का चलन और पंरपराओं का निर्वहन कम होता जा रहा है। वही दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी है जो इन पलों को यादगार बनाने के लिए आज भी रीति रिवाजों और परंपराओ को बचाने में लगे है। बालाघाट के वारासिवनी में बीते दिवस एक ऐसी ही बारात निकली जो की पुरातन रिवाजों से सजी थी। बारात में महंगी मोटर गाड़ियां नहीं खाचर एक पारंपरिक बैल गाड़ी थी। जिसमें चढ़ कर सिर्फ दूल्हा ही नहीं बल्कि पूरी बारात दुल्हन को लेने पहुंची। सजी हुई खाचर और उस पर निकली बारात जहां से गुजरी हर किसी का ध्यान इस बारात ने खींच लिया। 





 

यह बारात रीति रिवाजों और परम्परा को सुरक्षित रखने के लिए वारासिवनी क्षेत्र के टेकाडी पठारटोला से कौलीवाड़ा के बीच निकली जिसमें देवेन्द्र ठाकरे नामक दूल्हा कवलीवाड़ा की जान्हवी नामक दुल्हन को लेने जब एक दर्जन रेहके यानी खाचर लेकर अपने ससुराल पहुंचा। 





 

वाद्य यंत्र भी पुराने, बाराती भी पारंपरिक वेशभूषा में 


बारात में गजकुंडी का शोर, सिंग ग्रामीण वाद्य यंत्र की मधुरता, बैलों में बंधे हुए घोलर, झूल पर्दा सही में आधुनिकता के युग में ग्रामीण परिवेश के बाद भी नएपन का अहसास करा रहे थे, टेकाडी के मध्यम परिवार के दूल्हे राजा देवेंद्र ठाकरे ने बताया कि उनका विवाह आज कौलीवाड़ा में जान्हवी उर्फ निशा के साथ संपन्न हो रहा है। उनकी सोच परंपराओं का पालन कर शादी रचाने की थी। 

 


7 गांवों से जमा कर 1 माह में सजाए गए खाचर


एक दर्जन खाचर को एकत्र करने में 7 ग्रामों की मदद और एक माह का समय लगा, खाचर को दुरस्त कर सजाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, ज्ञात हो कि पवार समाज की यह शानदार बारात 25 किलोमीटर पैदल चलकर चार घण्टे में धूप में कवलीवाड़ा पहुची, गर्मी के बाद भी बारातियों के चेहरे पर रीतिरिवाजों को सहेजने की खुशी देखी गई, आज यह बारात जहां-जहां से गुजरी वहां-वहां सेल्फी, फ़ोटो, वीडियो बनाने वालों की कतार लग गई, बारात में वारासिवनी नपा अध्यक्ष विवेक पटेल भी शामिल रहे।