comScore

पिक्चर पाठशाला: कटरीना ने बताया इस कदम को अतुलनीय, कहा- बच्चों के विकास में करेगी मदद

पिक्चर पाठशाला: कटरीना ने बताया इस कदम को अतुलनीय, कहा- बच्चों के विकास में करेगी मदद

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। पिक्चर पाठशाला ने हाल ही में सलमान खान के बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन और बुक ए स्माइल को धन्यवाद दिया, जो हर कदम पर उनकी पहल का समर्थन करते है। इस कार्यक्रम में कैटरीना कैफ, अलवीरा और अतुल अग्निहोत्री, सोहेल खान, अरबाज खान, सुनील ग्रोवर ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। अभिनेत्री कैटरीना कैफ इस मौके पर पिक्चर पाठशाला जैसी उम्दा पहल के बारे में दिल खोल कर बात करते हुए नज़र आई।

एक्ट्रेस ने कहा कि "यह अतुलनीय है! ऐसा कुछ करना अपने आप में बेहद खास होता है और वो भी मजेदार अंदाज़ मे। एक तरह से यह बच्चों को बातचीत करने और भाग लेने और यह तय करने की अनुमति देता है कि वे क्या कहना चाहते हैं। किस बारे में बात करना चाहते हैं" कटरीना कैफ ने पिक्चर पाठशाला जैसी पहल के महत्व पर साझा किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह उन बच्चों की समग्र विकास में मदद करता है जो सामुदायिक सेवा के उद्देश्य के साथ मीडिया अध्ययन का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

यह भी पढ़े: चल गया सैफ की जवानी का जलवा, सिनेमाघरों में 'ओले-ओले' की मच रही धूम

5 साल में किया गया 200 फिल्मों का निर्माण
पिक्चर पाठशाला, भारत में "कंटेंट मेड बाय चिल्ड्रन" ...  टू सपोर्ट चिल्ड्रन सिनेमा फॉर चेंज" का सबसे बड़ा उत्पादक है। जिसके अंतर्गत 5 साल में 200 लघु फिल्मों का निर्माण किया गया, जिन्हें 47 अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाया गया है। इस खास अवसर पर, सह-संस्थापक और गुरु-शिष्य की जोड़ी श्वेता पारेख और अयान अग्निहोत्री द्वारा एक धन्यवाद स्पीच दी गयी थी जिसने वहाँ उपस्थित पूरी भीड़ को भावुक कर दिया और सभी को इस बात पर बहुत गर्व था कि वे बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए कितनी मेहनत कर रहे है।

इन क्षेत्रों में चल रही कार्यशालाओं की तैयारी
सैंडूक का सिनेमा स्कूल रायगढ़ का चेरिवली गाँव, पिंगुली गाँव सिंधुदुर्ग, बीकानेर के रायसर गाँव, दांडी गाँव नवसारी और लद्दाख में स्थित भारत का आखिरी गाँव तुरतुक में पहुँच गया है और जल्द जैसलमेर, असम, बंगाल और कन्याकुमारी में अपनी अगली कार्यशालाओं की तैयारी कर रहा है।

ये हैं इन पाठशालाओं के नाम
अपनी परियोजनाओं को स्व-वित्त करने के लिए पिक्चर पाठशाला ने अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी शुरू किए हैं जो मीडिया स्टडीज़ और कम्युनिटी सर्विस को भारत से भारत को जोड़ने का काम करते हैं। इन प्रोजेक्ट के नाम स्क्रीन सावरी, इम्पकटौर और द यूथ प्रेस है।

कमेंट करें
wk2iz