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Tanhaji Review: अजय काजोल की कैमेस्ट्री और सैफ की दमदार एक्टिंग, एक्शन सीन और 3डी इफेक्ट देखने लायक


डिजिटल डेस्क, मुम्बई। मराठा साम्राज्य की शूरवीरता पर आधारित फिल्म तानाजी: द अनसंग वॉरियर आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में अजय देवगन, सैफ अली खान, काजोल, शरद केलकर, नेहा शर्मा, पद्मावती राव, शशांक शेंडेट जैसे कलाकार हैं। इस हिस्टोरिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है। इस दो घंटे 15 मिनट की फिल्म में आपको जांबाजी, रोमांस, थ्रिल, विश्वासघात जैसे सारे एलिमेंट्स देखने को मिलेंगे। फिल्म में दिए गए 3डी इफेक्ट देखने लायक हैं।

कान्सेप्ट
फिल्म की कहानी 4 फरवरी 1670 को सिंहगढ़ में हुए युद्ध पर आधारित है। कहानी इतिहास के उस पन्ने की है, जहां औरंगजेब (ल्यूक केनी) पूरे हिंदुस्तान पर मुगलिया परचम को लहराने की रणनीति बना रहा है और दक्खन (दक्षिण) शिवाजी महाराज(शरद केलकर) अपने स्वराज्य को लेकर ली गई कसम के प्रति कटिबद्ध है। वहीं 17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज का परममित्र और जांबाज योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे (अजय देवगन) अपनी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) के साथ अपने बेटे की शादी की तयारियों में व्यस्त हैं और इस बात से अंजान है। लेकिन जब तानाजी को इस बारे में पता चलता है तो... यही से शुरु होती है फिल्म की असली कहानी। इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। 

एक्टिंग
एक्टिंग की बात की जाए तो अजय देवगन वैसे ही बहुत फाइन एक्टर है। इस फिल्म में उनकी मंझी हुई अदाकारी देखने लायक है। फिल्म में उन्होंने साम्राज्य के लिए मरने मिटने वाला इमोशन बखूबी निभाया। रियल लाइफ की तरह, रील लाइफ में भी काजोल के साथ उनकी कैमेस्ट्री देखने लायक है। वहीं फिल्म में सैफ अली खान लाजवाब रहे। कई जगहों पर उनकी अदाकारी अजय से भी बेहतर है। शिवाजी के रूप में भले शरद केलकर की कदकाठी मैच न खाती हो, मगर अपने बॉडी लैंग्वेज और भाव-भंगिमा से उन्होंने इस किरदार जीवंत कर दिया। अन्य सह कलाकारों भी अदाकारी शानदार रही।

डायरेक्शन
बेस्ट डायरेक्टर का फिल्फेयर अवॉर्ड जीत चुके ओम राउत ने फिल्म की कहानी के साथ वीएफएक्स पर भी खूब मेहनत की है। 3डी के अंतर्गत युद्ध के दृश्यों को देखना किसी विजुअल ट्रीट से काम नहीं है। जर्मनी के एक्शन डायरेक्टर रमाजान ने मराठा की छापमार युद्ध तकनीक को ध्यान में रखते हुए उस दौर के वॉर सीन्स को डिजाइन किया, जो काफी रोचक और थ्रिलिंग बन पड़े हैं। फिल्म में तलवारबाजी, घाटियों के बीच विजुअल इफेक्ट्स बहुत ही उंदा तरीके से दिखाए गए हैं। 

म्यूजिक
संगीत की बात की जाएं तो सचेत परंपरा, अजय-अतुल और मेहुल व्यास जैसे संगीतकारों की मौजूदगी में 'शंकरा रे शंकरा', 'माय भवानी' और 'घमंड कर' जैसे गाने और उनकी कोरियोग्राफी अच्छी है। जिसे लोगों द्वारा पहले ही पसंद किया जा चुका है। 

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