दैनिक भास्कर हिंदी: Dream Girl review: पूजा की प्यार भरी बातों में ​छुपा एक संदेश, जानने के लिए जरुर ​देखिए फिल्म

September 14th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। अपनी हर फिल्म की तरह एक बार आयुष्मान खुराना दर्शकों के लिए लेकर आए हैं ड्रीमगर्ल। इस फिल्म में आयुष्मान ने अपने रोल के साथ थोड़ा एक्सपेरिमेंट किया है। वे इस बार लड़की की आवाज में दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। राज शांडिल्य के निर्देशन में बनीं यह फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में नुसरत भरुचा लीड एक्ट्रेस हैं। साथ ही आयुष्मान और नुसरत पहली बार साथ में स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। 

फिल्म की कहानी की बात की जाए तो मथुरा में अपने पिता जगजीत सिंह (अन्नू कपूर) के साथ रहनेवाला युवा करम सिंह (आयुष्मान खुराना) बेरोजगारी से परेशान है। पिता परचून की दुकान चलाते हैं, मगर उनका घर गिरवी रखा हुआ है और उन पर कई बैंकों के लोन भी हैं। करम सिंह के साथ एक दूसरा मसला यह है कि वह बचपन से ही लड़की की आवाज बहुत ही खूबसूरती से निकालता है और यही वजह है कि बचपन से ही मोहल्ले में होनेवाली रामलीला में उसे सीता और कृष्णलीला में राधा का रोल दिया जाता है। इस तरह करम सिंह चार पैसे भी कमा लेता था। अपने इसी रोल की वजह से करम सिंह को बहुत पहचान भी मिली, लेकिन उसके पिता चाहते थे कि वे एक सम्मानित नौकरी हासिल करें। 

यही से शुरू होती है फिल्म की असली कहानी। नौकरी की तलाश में करम सिंह को छोटू (राजेश शर्मा) के कॉल सेंटर में मोटी तनख्वाह पर जॉब तो मिल जाती है, मगर शर्त यह है कि उसे लड़की की आवाज निकालकर क्लाइंट्स से मीठी-मीठी प्यार भरी बातें करनी होंगी। घर की जरुरतों को ध्यान में रखकर वह इस नौकरी के लिए तैयार हो जाता है। करम सिंह के इस राज को उस का दोस्त स्माइली (मनजोत सिंह) ही जानता है। इसके अलावा उसकी मंगेतर माही (नुसरत भरूचा) तक को इस बारे में जानकारी नहीं है। 

कॉल सेंटर में पूजा बनकर प्यार भरी बातें करने वाले करम की आवाज का जादू पुलिस वाले राजपाल (विजय राज ), माही के भाई महेंद्र (अभिषेक बनर्जी), किशोर टोटो (राज भंसाली), रोमा (निधि बिष्ट) और तो और खुद उसके अपने पिता जगजीत सिंह के सिर इस कदर चढ़कर बोलता है कि सभी उसके इश्क में पागल होकर शादी करने को उतावले हो उठते हैं और पूजा के पीछे पागल हो जाते हैं। 

फिल्म के निर्देशन की बात की जाए तो पहली बार निर्देशक की भागदौड़ संभालने वाले राज शांडिल्य की यह साफ सुधरी कॉमेडी फिल्म है। जाने माने लेखन राज शांडिल्य ने इस फिल्म में हास्य, मनोरंजन और इमोशंस के पल जुटाए हैं। इसके बावजूद फिल्म का  फर्स्ट हाफ उतना कसा हुआ नजर नहीं आता। लेकिन धीरे धीरे फिल्म की कहानी रफ्तार पकड़ती है और प्री-क्लाइमैक्स में कॉमिडी ऑफ एरर के कारण हंसाते हैं। 

निर्देशक ने आयुष्मान-नुशरत के लव ट्रैक को डेवलप करने में भी खूब जल्दबाजी की है। फिल्म के अंत में राज शांडिल्य ने यह मैसेज देने की कोशिश की है कि सोशल मीडिया अनगिनत दोस्तों के दौर में हर आदमी अकेला है। निर्देशक का यह मैसेज दर्शकों के दिल को छू जाता है। 

एक्टिंग की बात करें तो फिल्म में आयुष्मान खुराना हिलेरियस साबित हुए हैं। पूजा के रूप में उनका वॉइस मोड्युलेशन और बॉडी लैंग्वेज हंसा-हंसा कर लोट-पोट कर देता है। उन्होंने दी हुई भूमिका के साथ हर तरह से न्याय किया है। नुसरत भरूचा को स्क्रीन पर बहुत ज्यादा मौका नहीं मिला है, इसके बावजूद उन्होंने अच्छा काम किया है। सहयोगी भूमिकाओं में अन्नू कपूर ने जगजीत सिंह की भूमिका में सबका मनोरंजन किया है।

पूजा के प्यार में मजनू बने अन्नू कपूर की कॉमिक टाइमिंग देखने योग्य है। मनजोत सिंह और विजय राज भी हंसाने में पीछे नहीं रहे हैं। अन्य भूमिकाओं में अभिषेक बनर्जी, निधि बिष्ट, राज भंसाली और दादी बनी सीनियार अभिनेत्री ने अच्छा काम किया है। मीत ब्रदर्स के संगीत में 'दिल का टेलिफोन', 'राधे राधे' गाने पसंद किए जा रहे हैं। इनकी कोरियॉग्राफी भी दर्शनीय है। दर्शकों को समय निकालकर एक बार यह फिल्म जरुर देखने चाहिए। क्योंकि यह फिल्म आपके मूड को मस्त कर सकती है। साथ पूजा की आवाज आपको भी दीवाना बना सकती है। 

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