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Love Story: काजोल ने बताई अपनी लवस्टोरी, शेयर किए कुछ दर्द भरे लम्हें

Love Story: काजोल ने बताई अपनी लवस्टोरी, शेयर किए कुछ दर्द भरे लम्हें

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल लंबे समय बाद फिल्मी पर्दे पर अपने पति अजय संग ​स्क्रीन शेयर कर रही हैं। दोनों 11 साल बाद फिल्म तानाजी: द अनसंग वॉरियर में साथ दिखाई देंगे। खास बात यह है कि इस फिल्म में भी दोनों पति पत्नी की भूमिका में हैं। यह फिल्म दोनों के लिए खास इसलिए भी है, क्योंकि यह अजय की 100 वीं फिल्म है। फिल्हाल ​तानाजी के रियल और रील कपल फिल्म के प्रमोशन में बिजी हैं। इस दौरान काजोल ने अपने और अजय के रिश्ते के बारे में कई खुलासे किए। काजोल ने इस दौरान अपनी लव लाइफ और इससे जुड़े कुछ दर्द भरे लम्हों का भी जिक्र किया। 

ऐसी थी पहली मुलाकात
एक्ट्रेस ने बताया कि "हम 25 साल पहले फिल्म हलचल के सेट पर मिले थे। मैं शॉट के लिए तैयार थी और पूछ रही थी कि मेरा हीरो कहां है? किसी ने अजय की तरफ इशारा किया... वो एक कोने में बैठे हुए थे। तो 10 मिनट पहले मैं अजय मिली थी। मैंने उनकी खूब बुराई की। फिर बाद में हमने बातें करना शुरू किया। हम दोस्त बने। उस वक्त मैं किसी को डेट कर रही थी और अजय भी। मैं अजय से मेरे बॉयफ्रेंड की शिकायत करने लगी। जल्द ही हम दोनों का अपने पार्टनर से ब्रेकअप हो गया।"

नहीं किया एक दूसरे को प्रपोज
काजोल ने आगे बताया कि "हम दोनों ने एक-दूसरे को प्रपोज नहीं किया। ये आपसी समझ थी कि हम साथ हैं। हम दोनों डिनर पर जाने लगे। बहुत सारी ड्राइव्स पर गए। अजय जुहू मैं रहते थे। मैं साउथ बॉम्बे में रहती थी। तो हमारा आधा रिलेशनशिप कार में ही बीता। मेरे दोस्तों ने अजय के बारे में मुझे चेताया। लेकिन मेरे लिए अजय अलग थे। हमने 4 साल डेटिंग की। जब हमने शादी करने का फैसला किया। अजय के माता-पिता तैयार थे, लेकिन मेरे पापा ने मुझसे 4 दिन तक बात नहीं की। वो चाहते थे कि मैं अपने करियर पर ध्यान दूं, लेकिन मैं निश्चित थी।"
 
मीडिया से बोला था झूठ
"हमें पता था कि हम अपनी लाइफ एक साथ बिताना चाहते थे। हमने घर पर शादी की और मीडिया को गलत जगह के बारे में बताया। हम चाहते थे कि ये हमारा दिन हो। हमारी एक पंजाबी और एक मराठी सेरेमनी थी। मुझे याद है, फेरे के दौरान अजय पंडित से जल्दी करने के लिए कह रहे थे और पंडित को रिश्वत देने की भी कोशिश की।"

लंबा हनीमून चाहती थीं काजोल
काजोल ने बताया कि शादी के बाद "मैं एक लंबा हनीमून चाहती थी। इसलिए हम सिडनी, हवाई, लॉस एंजेलिस गए। लेकिन 5 हफ्ते में अजय बीमार पड़ गए और कहा, 'बेबी, अगली फ्लाइट की टिकट बुक कर दो। हमें इजिप्ट जाना था लेकिन फिर हमने इसे छोटा कर दिया।"

दो बार हुआ मिसकैरिज
"समय के साथ, हमने बच्चे पैदा करने की प्लानिंग की। मैं कभी खुशी कभी गम के दौरान प्रेग्नेंट थी, लेकिन मिसकैरिज हो गया था। मैं उस दिन अस्पताल में थी। फिल्म ने इतना अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन मेरे लिए ये सुखद समय नहीं था। उसके बाद मेरा एक और मिसकैरिज हुआ था। ये बहुत मुश्किल था, लेकिन आखिरकार ये काम कर गया। अब हमारे पास न्यासा और युग हैं। हमारा परिवार पूरा हो गया।"

अब लाइफ संतुष्ट है
"हम बहुत कुछ कर चुके हैं। हमने अपनी खुद की कंपनी बनाई है। अजय अपनी 100 वीं फिल्म पर हैं। हर दिन हम कुछ नया बना रहे हैं। अजय के साथ लाइफ संतुष्ट है। हम बहुत ज्यादा रोमांटिक नहीं हैं। लेकिन हम एक दूसरे की परवाह करते हैं। अगर मैं बेवकूफी की बातें सोच रही हूं, तो वो मेरे मुंह से बिना सोचे समझे निकल जाएगा। जैसे कि मैं अभी सोच रही हूं कि अजय मुझे इजिप्ट लेकर जाए।"

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।