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War Review: रोंगटे खड़े कर देंगे टाइगर-ऋतिक के एक्शन्स, इमोशन और लोकेशन भी जीत लेंगे आपका दिल

War Review: रोंगटे खड़े कर देंगे टाइगर-ऋतिक के एक्शन्स, इमोशन और लोकेशन भी जीत लेंगे आपका दिल

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। ऋतिक रोशन और टाइगर श्रॉफ स्टारर फिल्म 'वॉर' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में वाणी कपूर भी अहम किरदार में हैं। फिल्म का डायरेक्शन सिद्धार्थ आनंद ने किया है। यशराज फ‍िल्‍म्‍स के बैनर तले बनी इस फ‍िल्‍म को आदित्य चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में दमदार एक्शन सीन्स को दिखाया गया है। यही एक्शन सीन्स फिल्म की यूएसपी है। एक्शन सीन्स के अलावा वाणी अदाएं भी इस फिल्म में देखने लायक है।

फिल्म की कहानी की बात की जाए तो फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है एक सवाल से। वह सवाल यह है कि देख पर मर मिटने वाला एजेंट कबीर आखिर अपने सीन‍ियर्स पर अटैक क्‍यों कर रहा है? कबीर को काबू में लाने की ड्यूटी मिलती है उसके जून‍ियर खाल‍िद यानी टाइगर श्रॉफ को। फिल्म में फ्लैशबैक में ये भी सामने आता है कि पहले कबीर अपने अंडर खालिद को को ट्रेनिंग नहीं देना चाहता था और बाद में उसी पर आंख बंद करके भरोसा करने लगता है। फिल्म कहानी में एक के बाद एक ऐसे कई राज खुलते हैं और कहानी जो मोड़ लेती है। उसे देखने के लिए आपको यह फिल्म देखना पड़ेगा। 

​फिल्म के एक्शन सीन की बात करें तो ऋतिक और टाइगर के एक्शन सीन देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। फ‍िल्‍म के एक्‍शन की तुलना हॉलीवुड से की जा सकती है क्‍योंकि चाहे वो बाइक चेज का सीन हो या अंत में दोनों की हाथापाई, साथ में टेररर‍िस्‍ट को पकड़ना हो या हवा में र‍ित‍िक रोशन के स्‍टंट - एक पल भी फ‍िल्‍म में ऐसा नहीं आता जब आप इसका रोमांच मिस करना चाहें। फ‍िल्‍म से दो इंटरनेशनल एक्‍शन कोर‍ियोग्राफर जुड़े हैं और उनके काम की झलक आपको हर एक्‍शन व‍िजुअल में साफ दिखती है। 

सिर्फ खतरनाक स्टंट ही नहीं फिल्म के इमोशंस भी आपकी आंखे नम करने में कोई कसर नहीं छोड़गे। इमोशंस वॉर का एक प्‍लस पॉइंट है। एक्‍शन और लोकेशन के बीच इमोशन अपना काम कब कर गए, इसका अहसास आपको तब होता है जब रोमांच से खुली आंखें जज्‍बातों को समझ हल्‍की सी नम होने लगती हैं।

लगभग 200 करोड़ के बजट में बनीं इस फिल्म का ज्यादातर हिस्सा फॉरेश लोकेशंस पर शूट ​हुआ है। द‍िल्‍ली का कनॉट प्‍लेस तो स‍िडनी का ओपेरा हाउस, इटली की मस्‍ती तो पुर्तगाल की सड़कों के अलावा स्‍व‍िटजरलैंड, स्‍वीडन जैसी लोकेशंस की झलक आपको इस फिल्म में देखने मिलेगी। फिल्म की खूबसूरत लोकेशंस आपका मन मोह लेंगी। 

वैसे तो डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद रितिक के साथ आज से पांच साल पहले फिल्म बैंग बैंग बना चुके हैं। यह फिल्म भी 2 अक्टूबर 2014 को रिलीज हुई थी। सिद्धार्थ ने पुरानी फिल्म में हुई गलतियों के बाद इस फिल्म को और मजबूती से ​बनाया है। साथ ही ऋतिक और टाइगर के टैलेंट का भरपूर यूज भी किया हैं, जो सिद्धार्थ की सबसे बड़ी जीत है। 

फिल्म के गाने तो पहले ही हिट हो चुके हैं। फिल्म में गाने देखकर आपको ऐसा कतई नहीं लगेगा कि इन्हें जबरन में डाला गया है। ​गाने फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। हालांकि 'जय जय शिव शंकर' गाना अचानक पर्दे पर आता है, लेकिन ऋतिक और टाइगर को एक ही पर्दे पर एक साथ उन्हीं के अंदाज साथ में थिरकते हुए देखना इसे खलने नहीं देगा। गाना खत्म होते होते लगेगा कि मानो आप इसी का इंतजार कर रहे थे। 

कम शब्दों में कहा जाए तो फिल्म की लोकेशंस, स्टंट और कहानी इस फिल्म को और भी ज्यादा रोमांचित बना देती है। यंग क्राउड को यह फिल्म अट्रैक्ट करेगी। वैसे भी लंबे समय से पर्दे पर ऐसी कोई फिल्म नहीं आई हैं, जिसमें डांस, एक्शन, मसाला, इमोशंस और शानदार लोकेशंस हो। इन सब चीजों के मजे लेने के लिए आपको एक बार य​ह फिल्म जरुर देखना चाहिए। 

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।