comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

Bollywood: कंगना ने साधा आमिर खान पर निशाना, पूछा- इन्टॉलरेंस गैंग ने इस देश में कितने कष्ट सहे?

Bollywood: कंगना ने साधा आमिर खान पर निशाना, पूछा- इन्टॉलरेंस गैंग ने इस देश में कितने कष्ट सहे?

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने खुद को झांसी की रानी, वीर सावरकर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आइडल बताते हुए एक्टर आमिर खान को टारगेट पर लिया है। कंगना ने आमिर खान को भी टैग करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, 'जैसा रानी लक्ष्मीबाई का किला तोड़ा था मेरा घर तोड़ दिया, जैसे सावरकर जी को विद्रोह के लिए जेल में डाला गया था मुझे भी जेल भेजने की पूरी कोशिश की जा रही है। इन्टॉलरैंस गैंग से जाकर कोई पूछे कितने कष्ट सहे हैं उन्होंने इस इन्टॉलरैंट देश में?' बता दें कि आमिर खान भी कई बार इंटॉलरन्स के मुद्दे पर बोल चुके हैं, उन्होंने कहा था कि मेरी पत्नी किरण को भी ये देश इंटॉलरंट लगने लगा है वो चाहती हैं कि उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए।

और क्या कहा कंगना रनौत ने?
कंगना रनौत ने एक अन्य ट्वीट में महाराष्ट्र सरकार को फासीवादी बताया है। उन्होंने लिखा, 'कैंडल मार्च गैंग, अवॉर्ड वापसी गैंग देखो फासीवाद का विरोध करने वाले क्रांतिकारियों के साथ क्या होता है? तुम सबकी तरह नहीं। तुमको कोई पूछता भी नहीं है। मुझे देखो, मेरे जीवन का मतलब महाराष्ट्र की फासीवादी सरकार से लड़ना है। तुम सबकी तरह धोखाधड़ी करना नहीं।' कंगना ने तीसरे ट्वीट में लिखा, 'मैं सावरकर, सुभाषचंद्र बोस और झांसी की रानी की पूजा करती हूं। आज यह सरकार मुझे जेल में डालने की कोशिश कर रही है। जल्दी ही जेल होने और उन्हीं दुखों से गुजरने का इंतजार कर रही हूं, जिनसे मेरे आदर्श गुजरे। यह मेरे जीवन को सार्थक बनाएगा।'

कंगना के खिलाफ कई FIR
बता दें कि कंगना के खिलाफ राजद्रोह, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और मुंबई पुलिस के लिए आपत्तिजनक शब्द बोलने के आरोप में केस दर्ज हुए है। 17 अक्टूबर को बांद्रा कोर्ट के आदेश पर कंगना के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। कास्टिंग डायरेक्टर और फिटनेस ट्रेनर साहिल अशरफ अली सैयद ने कंगना और उनकी बहन रंगोली चंदेल पर बॉलीवुड में धर्म के नाम पर फूट डालने का आरोप लगाया है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को 26 और 27 अक्‍टूबर को इन्‍वेस्टिगेशन ऑफिसर के सामने पेश होने के लिए कहा है। करीब 10 दिन पहले किसानों के अपमान के आरोप में तुमकुर (कर्नाटक) के क्याथासांद्रा थाने में भी कंगना के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी।

कमेंट करें
y5XGr
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।