दावा: सुरभि अस्पताल में 2.74 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप, 230 मरीजों के बिलों का लेखा-जोखा नहीं

सुरभि अस्पताल में 2.74 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप, 230 मरीजों के बिलों का लेखा-जोखा नहीं
  • फॉरेंसिक ऑडिट में वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर उजागर होने का आरोप
  • डॉ. राकेश गांधी सहित अन्य के खिलाफ तोफखाना थाने में मामला दर्ज

डिजिटल डेस्क, अहिल्यानगर। शहर के सुरभि हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड में कथित आर्थिक अनियमितताओं, मरीजों की बिलिंग में गड़बड़ी और वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर का मामला सामने आया है। इस संबंध में तोफखाना पुलिस थाने में डॉ. राकेश कांतिलाल गांधी सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में कोविड उपचार के बिलों समेत अस्पताल के विभिन्न वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले से शहर के चिकित्सा क्षेत्र में हलचल मच गई है।

शिकायत के अनुसार, कथित अनियमितताएं 7 दिसंबर 2017 से 31 मार्च 2023 के बीच हुईं। फॉरेंसिक ऑडिट में अस्पताल में उपचार कराने वाले 230 मरीजों के बिल कंपनी के लेखा अभिलेखों में दर्ज नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन अनियमितताओं से कंपनी को करीब 2.74 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

बिना सेवा लिए भुगतान दर्शाने का आरोप

शिकायत में सुरभि अस्पताल और समृद्धि हेल्थकेयर के बीच पैथोलॉजी प्रयोगशाला सेवाओं के लिए हुए समझौते पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि समझौते के बावजूद सुरभि अस्पताल ने समृद्धि हेल्थकेयर से वास्तव में कोई सेवा नहीं ली, लेकिन लेखा अभिलेखों में कारोबार दर्शाकर बड़ी रकम निकाली गई।

शिकायत के मुताबिक, समृद्धि हेल्थकेयर में डॉ. राकेश गांधी की पत्नी राजश्री गांधी, अस्पताल के संचालक डॉ. आशिष भंडारी की पत्नी आरती भंडारी और समृद्धि निकम साझेदार थीं। आरोप है कि बिना सेवाएं दिए कारोबार दर्शाकर रकम परिवार के सदस्यों के नाम पर प्राप्त की गई और इसका इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया।

अस्पताल के सॉफ्टवेयर में भी छेड़छाड़

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल के प्रबंधन सॉफ्टवेयर में मरीजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी प्रविष्टियां जानबूझकर हटाई गईं या उनमें बदलाव किया गया। इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज डॉ. गांधी अपने परिवार के सदस्यों और एक मित्र की मदद से ले गए तथा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

शिकायत के अनुसार, कंपनी के वित्तीय लेन-देन पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाले संबंधित लोगों ने अपने अधिकारों का कथित दुरुपयोग कर कंपनी के हितों को नुकसान पहुंचाया। फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

पुलिस उपाधीक्षक दिलीप टिपरसे और पुलिस निरीक्षक बालाजी वैद्य के मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक परशुराम दलवी मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

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