रोज की तूतू-मैंमैं: पति पासवर्ड साझा करने को तैयार नहीं, तो पत्नी सोशल मीडिया पर नए दोस्तों में व्यस्त - दंपति के बीच मोबाइल बन रहा तलाक की वजह

पति पासवर्ड साझा करने को तैयार नहीं, तो पत्नी सोशल मीडिया पर नए दोस्तों में व्यस्त - दंपति के बीच मोबाइल बन रहा तलाक की वजह
  • 316 मामलों में 100 से अधिक में मोबाइल को लेकर विवाद
  • तलाक से पहले समझौते पर कोर्ट का जोर
  • एक-दूसरे पर अपनी बात मनवाने का दबाव

Chhatrapati Sambhaji Nagar News. परिवारों में पति-पत्नी के बीच अलगाव का कारण "वो" भी होता है, लेकिन अब उस वो की जगह मोबाइल ने ले ली है। मोबाइल की बढ़ती लत रिश्तों में दूरियां पैदा कर रही है और कई मामलों में विवाद तलाक तक पहुंच रहे हैं। पत्नी घर के काम और बच्चों की देखभाल के बजाय रील देखने में व्यस्त रहती है, तो पति ऑफिस से घर लौटने के बाद देर रात तक मोबाइल पर चैटिंग में लगा रहता है। पति मोबाइल का पासवर्ड साझा करने को तैयार नहीं होता, तो पत्नी सोशल मीडिया पर नए दोस्तों के साथ व्यस्त हो जाती है। इस तरह के विवाद अब जिला एवं सत्र न्यायालय तक पहुंचने वाले पारिवारिक मामलों की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। काउंसलिंग के लिए पहुंचे 316 मामलों में 100 से अधिक मामलों में मोबाइल को लेकर विवाद सामने आया है।

मोबाइल बन रहा रिश्तों में बाधा

काउंसलर डॉ. अशोक वाकुडकर ने कहा, “इन दिनों पति-पत्नी एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। मोबाइल के कारण भी कई तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। हम दोनों पक्षों को समझाकर उनके रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास करते हैं।”


316 परिवारों में कराया समझौता

जिला एवं सत्र न्यायालय के विवाद-पूर्व विवाह विषयक समुपदेशन केंद्र के माध्यम से 316 पारिवारिक मामलों में समझौता कराया गया। इससे 632 पक्षकारों को राहत मिली। प्राधिकरण के काउंसलरों ने पति-पत्नी और दोनों परिवारों से बातचीत कर विवादों का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तलाक से पहले समझौते पर कोर्ट का जोर

फैमिली कोर्ट में रोजाना 5 से 10 नए तलाक के मामले दाखिल होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय भी पारिवारिक विवादों में सीधे मुकदमेबाजी के बजाय आपसी समझौते और काउंसलिंग के माध्यम से समाधान पर जोर देते हैं। इसी उद्देश्य से विवाद-पूर्व काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है।


इन वजहों से भी बढ़ रहे पारिवारिक विवाद

प्राधिकरण के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत पारिवारिक विवाद अहंकार, दोनों परिवारों के बीच व्यवहार, दहेज, मोबाइल और छोटी-छोटी बातों से बढ़ते हैं। इनमें शिक्षित और नौकरीपेशा दंपतियों के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं।


एक-दूसरे पर अपनी बात मनवाने का दबाव

अहंकार : पति-पत्नी दोनों की ओर से एक-दूसरे पर अपनी बात मनवाने का दबाव और परिवार में वर्चस्व की भावना विवाद को बढ़ा रही है। कई मामले इसी कारण न्यायालय तक पहुंचते हैं।

दहेज और मान-पान : शादी में अपेक्षा के अनुसार दहेज, कपड़े या मान-पान नहीं मिलने से दोनों परिवारों के बीच विवाद शुरू हो जाते हैं, जो बाद में न्यायालय तक पहुंचते हैं।

एक-दूसरे को पर्याप्त समय न देना भी वजह

विवाह के बाद वैवाहिक जीवन में असंतोष, सास-ससुर से मतभेद, लिव-इन संबंध, मोबाइल पर तलाक की घोषणा, अंतरधार्मिक एवं अंतरजातीय विवाह और पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं देना भी पारिवारिक विवादों के प्रमुख कारण हैं।


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