उद्योग जगत में चिंता: अमेरिकी कंपनी लुब्रिज़ोल ने बिड़कीन से खींचे कदम, लगभग दो हजार करोड़ का प्रोजेक्ट अटका, गुजरात में किया बड़ा निवेश

अमेरिकी कंपनी लुब्रिज़ोल ने बिड़कीन से खींचे कदम, लगभग दो हजार करोड़ का प्रोजेक्ट अटका, गुजरात में किया बड़ा निवेश
  • 120 एकड़ जमीन से कंपनी ने किया किनारा, जल्द होगी दोबारा नीलामी
  • रणनीतिक बदलाव का हवाला; 900 रोजगार के अवसरों पर भी लगा ब्रेक
  • उद्योग जगत में चिंता, एमआईटीएल को अब नए निवेशक की तलाश

Chhatrapati Sambhaji Nagar News. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के बिड़कीन औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित अमेरिकी कंपनी लुब्रिज़ोल कॉर्पोरेशन का बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट अब पटरी से उतर गया है। कंपनी ने अपनी 120 एकड़ जमीन से बाहर निकलने का फैसला किया है। कंपनी ने कारोबार की रणनीति में बदलाव को इस फैसले की वजह बताया है।

करीब 1,914 करोड़ रुपए के निवेश से लुब्रिज़ोल का भारत में सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया जाना था। लुब्रिज़ोल ने जुलाई 2024 में महाराष्ट्र सरकार के साथ इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया था। उद्योग मंत्री उदय सामंत की मौजूदगी में मुंबई में हुए इस समझौते के बाद बिड़कीन में बड़े औद्योगिक निवेश की उम्मीद जगी थी।

प्रस्तावित संयंत्र भारत में कंपनी का सबसे बड़ा और दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बनने वाला था। परियोजना से आने वाले वर्षों में करीब 900 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई थी। कंपनी ने बिड़कीन में विनिर्माण संयंत्र के साथ अपना वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने की भी योजना बनाई थी। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, यह उसका सबसे बड़ा जीसीसी बनने वाला था।

कई विदेशी कंपनियों ने दिखाई रुचि

ऑरिक-महाराष्ट्र औद्योगिक टाउनशिप लिमिटेड (एमआईटीएल) के अधिकारियों के अनुसार, लुब्रिज़ोल के परियोजना से हटने के बाद यह जमीन जल्द ही दोबारा नीलाम की जाएगी। 120 एकड़ का भूखंड बिड़कीन के पहले चरण में अधिग्रहण के लिए उपलब्ध अंतिम बड़े भूखंडों में शामिल था। कॉस्मो फिल्म्स और जेएसडब्ल्यू के पास स्थित तथा दूसरी ओर रुचा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड से सटे इस भूखंड को औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुजरात में किया बड़ा निवेश

बिड़कीन परियोजना से बाहर निकलने के बीच लुब्रिज़ोल ने जनवरी 2026 में गुजरात में बड़ा निवेश घोषित किया था। कंपनी ने आदित्य बिरला समूह की ग्रासिम इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी में करीब 1,435 करोड़ रुपए के निवेश की योजना सामने रखी थी। यह परियोजना भारत के लगभग 6,000 करोड़ रुपए के सीपीवीसी रेजिन बाजार में कंपनी की मौजूदगी मजबूत करने के उद्देश्य से है। बिड़कीन परियोजना से कंपनी के हटने के साथ यहां जीसीसी स्थापित करने की योजना भी समाप्त हो गई है।

दूसरे चरण में कंपनियों की भारी दिलचस्पी

बिड़कीन डीएमआईसी के दूसरे चरण को लेकर हालांकि तस्वीर उत्साहजनक बनी हुई है। एमआईटीएल अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण के लिए देशी और विदेशी कंपनियों की ओर से 3,000 से अधिक रुचि/पूछताछ सामने आ चुकी हैं। ऐसे में लुब्रिज़ोल के हटने से जहां एक बड़ा प्रोजेक्ट हाथ से निकला है, वहीं 120 एकड़ के प्राइम प्लॉट को लेकर अब उद्योग जगत की निगाहें टिक गई हैं।

‘लुब्रिज़ोल के वापस जाने की जानकारी नहीं’

लुब्रिज़ोल कंपनी के वापस जाने को लेकर सीएमआईए के आशीष गर्दे से पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में किसी प्रकार का आइडिया नहीं है।”

‘नुकसान ही नुकसान है’

मासिआ के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन पवार ने कहा, “लुब्रिज़ोल कंपनी का वापस जाना यानी हमारे लिए नुकसान ही नुकसान है। आने वाली कंपनियां भी सोच सकती हैं कि हम रहें या नहीं रहें। नई-नई कंपनियां ऐसे मामलों को देखते हुए यहां नहीं आने से डीएमआईसी में कोई जगह नहीं लेगी। दो साल से किसी प्रकार का काम नहीं हुआ है। कंपनियों को लगता है कि सरकार उनके फेवर में नहीं है। साथ ही सड़कों की स्थिति जस की तस है, जो हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान है। सरकार को कंपनी से दोबारा बातचीत करने का प्रयास करना चाहिए।”

‘हमारे यहां आज भी चार हजार एकड़ जमीन की मांग’

एमआईटीएल के महाप्रबंधक पी.डी. मलिकनेर ने कहा, “इस जमीन के लिए देश-विदेश की कई कंपनियों की ओर से काफी रुचि दिखाई जा रही है। नीति के अनुसार जल्द ही प्लॉट को किसी अन्य उद्योग के लिए नीलाम किया जाएगा। कंपनी के बिजनेस का कुछ कैलकुलेशन बदल गया है। लेकिन आज भी हमारे यहां चार हजार एकड़ जमीन की डिमांड है।”

Created On :   26 Aug 2026 6:09 PM IST

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