कार्रवाई: सातपुड़ा की पहाड़ियों में साढ़े 7 करोड़ से ज्यादा का गांजा जब्त, वनक्षेत्र में पांच स्थानों पर चल रही थी अवैध खेती

डिजिटल डेस्क, धुलिया। जिले की शिरपुर तहसील में नशीले पदार्थ गांजे की करोड़ों रुपये की अवैध खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अज्ञात लोगों ने दूरस्थ पहाड़ी श्रृंखलाओं, गहरी खाइयों और घने जंगलों का फायदा उठाकर गांजे की फसल उगाई थी। वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई में महादेव दोंडवाड़ा क्षेत्र में पांच अलग-अलग स्थानों पर की जा रही अवैध खेती का पर्दाफाश हुआ। इस दौरान कुल 7.67 करोड़ रुपये मूल्य का 3,068 किलो गांजा जब्त कर नष्ट किया गया।
शिरपुर तहसील के वन विभाग के संभाग क्रमांक 1008 के अंतर्गत आने वाले महादेव दोंडवाड़ा क्षेत्र में यह कार्रवाई की गई। इस मामले में मोहन पाटील की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से दुर्गम पहाड़ी और वनक्षेत्र में गांजे की अवैध खेती की जा रही थी।
गांजे के पौधे अपनी जड़ों के साथ खड़े थे और उनकी ऊंचाई लगभग 3 से 5 फीट थी। 25 अक्टूबर की दोपहर को किए गए प्रारंभिक निरीक्षण में पता चला कि फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी। पौधों पर हरे पत्ते, फूल और शाखाएं विकसित हो चुकी थीं।
पौधों की कीमत 7.67 करोड़ रुपये से अधिक
अभियान के दौरान पांच अलग-अलग स्थानों से गांजे के पौधे बरामद किए गए। इनमें 1,528 किलो गांजा, जिसकी कीमत लगभग 3.82 करोड़ रुपये; 680 किलो, जिसकी कीमत 1.70 करोड़ रुपये; 320 किलो, जिसकी कीमत 80 लाख रुपये; 280 किलो, जिसकी कीमत 70 लाख रुपये और 260 किलो, जिसकी कीमत 65 लाख रुपये आंकी गई।
इस तरह कुल 3,068 किलो गांजे का बाजार मूल्य 7.67 करोड़ रुपये बताया गया है। कार्रवाई के दौरान गांजे की अवैध फसल को जब्त कर नष्ट कर दिया गया।
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दुर्गम वनक्षेत्र में खेती, निगरानी पर सवाल
सातपुड़ा की पहाड़ियों और घने जंगलों में इतने बड़े पैमाने पर गांजे की खेती सामने आने से वन विभाग और तहसील पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पांच अलग-अलग स्थानों पर करोड़ों रुपये मूल्य की फसल उगाए जाने के बावजूद इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली, यह जांच का विषय है।
वनक्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग कर नशीले पदार्थों की खेती करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और वन विभाग इस अवैध कारोबार के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कब तक गिरफ्तार करते हैं।
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