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Jabalpur News: प्रतिबंध के बावजूद शहर में धड़ल्ले से बेचे जा रहे वन्यजीव और पक्षी
डिजिटल डेस्क,जबलपुर। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचीबद्ध वन्यजीवों का शिकार, व्यापार, खरीद-फरोख्त, परिवहन, कब्जा एवं पालन दंडनीय अपराध है लेकिन शहर के कई इलाकों में इनकी बिक्री खुलेआम की जा रही है।
हाल ही में वन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्वीकार किया गया है कि बाजार में पेट शॉप एवं एक्वेरियम की दुकानों पर अवैध रूप से प्रतिबंधित वन्यजीव कछुए, पक्षी, जीवित प्राणी प्रजाति (अनुसूची-IV में वर्णित विदेशी प्रजाति के वन्यजीव, बिना रजिस्टर्ड वाले) आदि की बिक्री की जा रही है जो पूर्णतः गैर कानूनी है।
ये कारोबार वन्यजीवों की प्राकृतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध है। यह कृत्य सामान्य नागरिकों को भी कानून का उल्लंघन करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, जिससे आम नागरिक जाने-अनजाने अपराध के भागी बन रहे हैं। बता दें कि खरगोश, जंगली कबूतर, नेवला, कछुआ सहित कई वन्यजीव और पक्षी इस श्रेणी में आते हैं जिन्हें बिना अनुमति बेचना और पालना दोनों अपराध है।
पिछले माह हुई थी मात्र एक कार्रवाई
पिछले माह फरवरी में एसटीएसएफ एवं स्थानीय अमले के द्वारा कार्रवाई की गई थी जिसमें 313 जीवित अनुसूची-। प्रजाति के कछुओं की तस्करी करते हुए जब्त कर प्रकरण की अग्रिम विवेचना में कई लोगों को गिरफ्तार करते हुए इसमें एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया था।
जानकारों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई कम ही देखने मिलती है, विभाग द्वारा इक्का-दुक्का कार्रवाई करके खानापूर्ति कर ली जाती है। वन विभाग की उदासीनता के कारण अवैध वन्यजीव व्यापार फल-फूल रहा है, जबकि निर्देशों का उल्लंघन किये जाने पर सम्बन्धित के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के अंतर्गत वैधानिक कार्यवाही हो सकती है, जिसमें 7 वर्ष तक का कारावास एवं जुर्माने का प्रावधान है।
जबलपुर के आसपास वन्यप्राणियों की तस्करी नहीं होने दी जाएगी। यदि कोई मामला सामने आता है तो सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के विषय में आमजनों को जागरूक करने अभियान चलाया जाएगा।
पुनीत सोनकर, डीएफओ जबलपुर
Created On :   26 March 2026 5:48 PM IST












