Jabalpur News: स्कूलों की बाउंड्री से नजर आते हैं जंक फूड के ठेले टपरे, जिम्मेदार मौन

स्कूलों की बाउंड्री से नजर आते हैं जंक फूड के ठेले टपरे, जिम्मेदार मौन
50 मीटर की दूरी के नियम का नहीं हो रहा पालन, कानून की पेचीदगियों में उलझकर बचपन में ही बीमारियों के शिकार हो रहे मासूम

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की जंक फूड की दुकानें न होने का नियम लागू तो है, लेकिन उसे कानूनी पेचीदगियों में ऐसा उलझाया गया है कि उसकी आड़ में मासूमों के बचपने से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूलों की दीवारों से सटकर जंक फूड की दुकानें लगातार खुल रही हैं। इससे कम उम्र के बच्चों को पेट संबंधित कई बीमारियां हो रही हैं। जिला प्रशासन सहित नगर निगम कभी भी स्कूलों के आसपास इस पर कोई ध्यान नहीं देता।

स्कूलों से जंक फूड की दुकानों को दूर रखने के लिए वर्ष 2020 में नियम बना था। हालांकि शिक्षा विभाग ने इसमें हाई फैट, शुगर व साॅल्ट फूड का उल्लेख भी किया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें स्ट्रीट फूड का उल्लेख नहीं है।

जबकि देश में सर्वाधिक मात्रा में स्ट्रीट फूड का ही विक्रय होता है। शहर की बात करें तो सदर, राइट टाउन, नेपियर टाउन, घमापुर, मदन महल, बल्देवबाग, रांझी सहित ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहां स्कूलों के आसपास ही सैकड़ों की संख्या में खाने-पीने की दुकानें हैं।

इन पर कार्रवाई की बात तो छोड़ ही दीजिए, कोई यह तक देखने की जहमत नहीं उठाता है कि इनमें जो सामग्री बिक रही है वह मानकों पर खरी उतरती है या नहीं। सड़क की धूल से लेकर मक्खियों और मच्छरों की भरमार होने के बाद भी बच्चों को ऐसे फूड आइटम बेहद आकर्षिक करते हैं, जिससे वे तात्कालिक बीमारियाें की चपेट में आ जाते हैं। स्कूलों के सामने पहले अधिकांश ठेले और टपरे नजर आते थे, लेकिन अब स्कूलों के आसपास दुकानें भी खुल गई हैं।

इधर सूची में उलझा एफएसएसएआई

एक तरफ बच्चों को अच्छा खाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो दूसरी ओर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण एफएसएसएआई उन मानकों की तलाश में है जिससे यह तय किया जा सके कि कौन सी खाद्य सामग्री बच्चों के खाने योग्य है और कौन सी नहीं। इस पर कार्रवाई के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन उनके द्वारा कभी कार्रवाई नहीं की जाती है।

निजी स्कूल प्रबंधन नहीं देते ध्यान

इस मामले में जब संयुक्त संचालक लोक शिक्षण घनश्याम सोनी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के आसपास ठेले-टपरे नहीं होने चाहिए। इसका पालन भी हो रहा है लेकिन निजी स्कूल संचालक इन नियमों की अनदेखी करते हैं। इस मामले में जिला स्तर पर कार्रवाई हो तो बेहतर होगा।

Created On :   25 Sept 2026 4:59 PM IST

Tags

Next Story