Jabalpur News: स्कूल शिक्षा विभाग की पदोन्नति पर विवादों का साया

स्कूल शिक्षा विभाग की पदोन्नति पर विवादों का साया
पहले कहा गया सीपीसीटी जरूरी, फिर बिना उसके हो गए प्रमोशन

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। कार्यालय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के प्रस्ताव पर 45 सहायक ग्रेड 3 कर्मचारियों को सहायक ग्रेड 2 के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस आदेश से कर्मचारियों में खुशी तो देखी जा रही है, लेकिन पदोन्नति में हुई देरी पर भारी नाराजगी भी है। पहले संयुक्त संचालक कार्यालय ने पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा को अनिवार्य बताया था, लेकिन बाद में भोपाल से आए आदेश के तहत कहा गया कि यहां सीपीसीटी जरूरी नहीं है, तब तक 4 कर्मचारियों की पदोन्नति की जा चुकी थी। इस प्रकार अब वे 4 कर्मचारी बाकी से सीनियर कहे जाएंगे। वहीं एक भृत्य को भी पदोन्नति देने का मामला चर्चा में है।

स्कूल शिक्षा विभाग महाविद्यालयीन तृतीय श्रेणी लिपिक संवर्ग भर्ती एवं पदोन्नति नियम के तहत पदोन्नति नियम 2025 में दिए गए प्रावधानों के तहत आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा 22 सितम्बर की बैठक में दिए गए निर्देशानुसार 1 जुलाई 2013 के पूर्व नियुक्त सहायक ग्रेड-3 को सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य नहीं है। अतः प्रदत्त अधिकारों के तहत विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में पात्र पाए गए एवं अनुशंसित लोकसेवकों को सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत किया जाता है।

अपात्रों की पदोन्नति निरस्त नहीं हुई

कार्यालय संयुक्त संचालक की गलती उजागर होने के बाद 45 सहायक ग्रेड-3 से ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति आदेश तो जारी कर दिए गए, परन्तु पूर्व में जो आदेश 2 सितम्बर को जारी िकए गए थे उन्हें निरस्त नहीं किया गया। इससे कनिष्ठ लिपिक वरिष्ठों की तुलना में आगे रहेंगे, जबकि सीनियर उनके जूनियर कहे जाएंगे। इस पूरे मामले को लेकर असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।

आदेशों की मनमानी व्याख्या हुई

कर्मचारियों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि सीपीसीटी परीक्षा संबंधी आदेशों की मनमानी व्याख्या कर लिपिकों की वरिष्ठता को नजर अंदाज करते हुए कनिष्ठ 4 लिपिकों को सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह अनियमितता आयुक्त लोक शिक्षण के संज्ञान में आने के बाद सही की गई।

Created On :   7 Oct 2026 5:14 PM IST

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