जबलपुर न्यूज: खेलने जा सकें इसके लिए हर दर पर माथा टेका लड़कियों ने

डिजिटल डेस्क जबलपुर स्टेट लेबल प्रतियोगिता में सेमीफाइनल तक खेल के आईं छात्राओं को दो दिनों तक खूब भटकाया गया। यह भटकाव केवल महिला अटेंडर या कोच को लेकर था। हर महीने 2 से 3 लाख रुपये वेतन लेने वाले स्पोर्ट्स ऑफिसर किसी भी खेल प्रतियोगिता में शामिल नहीं होते हैं बल्कि वे केवल अपने वेतनमान पर स्टाफरूम में बैठकर चर्चा करते हैं। वही इस मामले में रादुविवि का फिजिकल एजुकेशन विभाग पूरी तरह से पल्ला झाड़ लेता है।
बताया जाता है कि विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिता को नेशनल लेबल का माना जाता है। टेबल टेनिस की खिलाड़ियों ने मेहनत की और पिछले दिनों छिंदवाड़ा में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इसके बाद उन्हें गुजरात के गोधरा में इंटर यूनिवर्सिटी खेलों में शामिल होने के लिए 30 अक्टूबर को गुजरात जाना है। इसके लिए एक महिला कोच या अटेंडर जरूरी होता है लेकिन इसके लिए उन्हें साफ मना कर दिया गया था। विश्विद्यालय के फिजिकल एजुकेशन विभाग में जब खिलाड़ी लड़कियों ने प्रो विशाल बन्ने से संपर्क किया तो उन्हें कहा गया डॉ अलका नायक से बात करो। नायक मैडम फोन नहीं उठाती हैं। इससे परेशान होकर छात्राओं ने बुधवार को सबसे पहले क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक प्रो अलकेश चतुर्वेदी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की टीम है इसलिए विश्विद्यालय ही महिला कोच का इंतजाम करेगा। इसके बाद छात्राएं रादुविवि के कुलगुरू प्रो राजेश कुमार वर्मा से मुलाकात की तो उन्होंने कई स्तर पर बात की लेकिन कुछ तय नहीं हो पाया। इसके बाद दोपहर में पता चला कि नरसिंहपुर की एक महिला टीचर गुजरात जाने के लिए तैयार हो गई है।
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