बॉम्बे हाई कोर्ट: आरोपी को आरोपों के मूल तथ्य लिखित रूप में बताना जरूरी, पुलिस रिमांड और न्यायिक रिमांड के आदेश रद्द

आरोपी को आरोपों के मूल तथ्य लिखित रूप में बताना जरूरी, पुलिस रिमांड और न्यायिक रिमांड के आदेश रद्द
  • अदालत ने व्यक्ति की गिरफ्तारी, मजिस्ट्रेट के दिए गए पुलिस रिमांड और न्यायिक रिमांड के आदेशों को किया रद्द
  • व्यक्ति पर एक महिला की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप
  • मुंबई के ताड़देव पुलिस स्टेशन में व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने व्यक्ति पर एक महिला की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप की गिरफ्तारी को लेकर अपने फैसले में कहा कि आरोपी को आरोपों के मूल तथ्य लिखित रूप में बताना जरूरी है, जिससे रिमांड का प्रभावी विरोध कर सके और जमानत मांग सके। केवल यह बताना कि आरोपी के विरुद्ध अपराध दर्ज है या जांच में उसकी संलिप्तता मिली है, पर्याप्त नहीं है।

न्यायमूर्ति श्याम चांडक की एकल पीठ ने शंकेश पृथ्वीराज संघवी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 एवं बीएनएसएस की धारा 47 के अनुसार आरोपों के मूल तथ्य लिखित रूप में बताना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के मामले में पुलिस द्वारा दी गई सूचना कानून की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थी। मजिस्ट्रेट ने भी यह संतुष्टि दर्ज नहीं की कि गिरफ्तारी की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ है। याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी अवैध घोषित की जाती है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 22 का उल्लंघन है। उसे 22 मई, 25 मई और 28 मई 2026 के सभी रिमांड आदेश रद्द किए जाते हैं। याचिकाकर्ता को तत्काल न्यायिक हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।

पीठ ने कहा कि यदि कानून के अनुसार भविष्य में आवश्यकता हो, तो राज्य को पुनः वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर गिरफ्तारी करने की स्वतंत्रता रहेगी। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले के आरोपों की सत्यता या मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, निर्णय केवल गिरफ्तारी की कानूनी वैधता के आधार पर दिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के वास्तविक आधार लिखित रूप में नहीं बताए गए। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी को पुलिस स्टेशन बुलाकर आरोपों की जानकारी दे दी गई थी। उसे गिरफ्तारी के कारण बताए गए थे। यदि कोई तकनीकी कमी भी रही हो, तो उससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।

क्या है पूरा मामला

पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से याचिकाकर्ता ने उसकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी। धमकी देकर उसके साथ कई बार दुराचार किया और अश्लील वीडियो कॉल कराए। उसे ब्लैकमेल कर 50 लाख रुपए की मांग की। इन आरोपों के आधार पर 21 मई 2026 को मुंबई के ताड़देव पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई और उसी रात याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया गया। याचिकाकर्ता ने अपनी गिरफ्तारी तथा मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए पुलिस रिमांड और न्यायिक रिमांड के आदेशों को चुनौती दी थी।

Created On :   2 July 2026 9:57 PM IST

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