विपक्ष का वॉकआउट: महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजा किसानों की आत्महत्या का मुद्दा, नाना पटोले ने सरकार को घेरा

महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजा किसानों की आत्महत्या का मुद्दा, नाना पटोले ने सरकार को घेरा
  • आत्महत्या के मुद्दे पर चर्चा न होने से विपक्ष का वॉकआउट
  • स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग

Mumbai News. विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को किसानों की आत्महत्या और कर्जमाफी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक नाना पटोले ने लातूर जिले के दो किसानों की आत्महत्या का मामला सदन में उठाते हुए राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कर्जमाफी के दावे किए जाने के बावजूद किसानों की आत्महत्या के मामलों में कोई कमी नहीं आई है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। पटोले ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समय राज्य विधानमंडल का मानसून सत्र चल रहा है, उसी दौरान लातूर जिले में दो किसानों ने अवैध साहूकारी के चलते आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सरकार की कृषि और कर्ज राहत नीतियों की विफलता को भी दर्शाती है।

अवैध साहूकारी को बताया आत्महत्या की वजह

पटोले ने सदन में आरोप लगाया कि आत्महत्या करने वाले किसान अवैध साहूकारों से लिया गया कर्ज नहीं चुका पाने के कारण आर्थिक और मानसिक दबाव में थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अवैध साहूकारी पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अब भी सूदखोरों के चंगुल में फंसे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लातूर वह जिला है, जहां से राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील आते हैं। इसके बावजूद उसी जिले में किसानों को कर्ज के बोझ से परेशान होकर आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर को दर्शाता है।

स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग

कांग्रेस विधायकों ने किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना था कि यह केवल दो किसानों का मामला नहीं, बल्कि पूरे राज्य के किसानों की बदहाल स्थिति का प्रतीक है। इसलिए सरकार को इस विषय पर विस्तृत चर्चा कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की अनुमति नहीं दी। अध्यक्ष के इस फैसले के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। पटोले ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी की मांग उठा रहा है, लेकिन सरकार इस पर कोई सकारात्मक निर्णय लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि आंशिक राहत या घोषणाओं से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक राज्य के सभी पात्र किसानों का पूरा कर्ज माफ नहीं किया जाएगा, तब तक उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आएगा। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

Created On :   2 July 2026 10:08 PM IST

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