बॉम्बे हाई कोर्ट: सीईसी विरोध प्रदर्शन में पुलिस हिरासत और 60 जेलों में बंद कैदियों के लिए अमानवीय परिस्थितियों के मामले में सुनवाई

सीईसी विरोध प्रदर्शन में पुलिस हिरासत और 60 जेलों में बंद कैदियों के लिए अमानवीय परिस्थितियों के मामले में सुनवाई
  • सरकार से सुधारात्मक कार्यों की मांगी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट
  • राज्य सरकार ने अदालत में दाखिल किया हलफनामा
  • एक साथ सभी प्रदर्शनकारियों के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की 60 जेलों में बंद कैदियों के लिए अमानवीय परिस्थितियों के मामले में राज्य सरकार से सुधारात्मक कार्यों की विस्तृत प्रगति का रिपोर्ट मांगा है। राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर दावा किया कि अदालत के 17 अप्रैल 2026 के आदेश के अनुपालन में सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। जेलों की परिस्थितियों की समीक्षा और सुधारात्मक उपायों के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है। 30 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई रखी गई है। मुख्य न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेथना की पीठ ने स्वत:संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए 17 अप्रैल 2026 के अपने आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और जेलों की परिस्थितियों में सुधार के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान सरकारी वकील ने राज्य के कारागार एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक ने न्यायालय में एक विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत किया। राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि 17 अप्रैल 2026 के आदेश के अनुपालन में सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अब तक हुई प्रगति और किए गए सुधारात्मक उपायों के संबंध में एक अतिरिक्त हलफनामा प्रस्तुत करना होगा। यह हलफनामा अगली सुनवाई की तिथि से पहले दाखिल करना होगा। उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा प्रस्तावित निरीक्षणों और अतिरिक्त हलफनामा के माध्यम से यह जांचा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में क्या कदम उठाए गए हैं? पीठ ने 30 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई रखी है। महाराष्ट्र की 60 जेलों और सुधार गृहों में लगभग 27500 कैदियों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 40400 से अधिक कैदी हैं, जो क्षमता से औसतन लगभग 144 फीसदी से 147 फीसदी अधिक है। कुछ जेलों में तो यह भीड़ बहुत अधिक है। जहां कल्याण की जेल में अपनी क्षमता के 406 फीसदी से अधिक कैदी है, वहीं ठाणे सेंट्रल जेल लगभग 381 फीसदी कैदी हैं। मुंबई की आर्थर रोड सेंट्रल जेल में 1000 से कम की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 3400 से अधिक कैदी हैं। इसके अलावा अधिक कैदियों वाले जेलों में नासिक रोड सेंट्रल जेल, तलोजा सेंट्रल जेल और नागपुर सेंट्रल जेल शामिल हैं।

मुंबई में सीईसी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में लेने का मामला, एक साथ सभी प्रदर्शनकारियों के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई में सीईसी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में लेने के मामले में एक साथ सभी प्रदर्शनकारियों को लेकर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि एक साथ सबके लिए आदेश नहीं दिए जा सकते। जनहित याचिका में 10 और 11 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर एहतियातन हिरासत और पुलिस की कथित ज्यादतियों को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेथना की पीठ के समक्ष सागर देवरे की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वकील मनीष तोमर ने मुंबई पुलिस को हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा कि हम ऐसे ब्लैंकेट ऑर्डर (एक साथ सबके लिए आदेश) नहीं दे सकते। जो भी मामले हैं, उन्हें रिकॉर्ड पर लाएं, हम उन पर ध्यान देंगे। पीठ ने सोमवार तक के लिए सुनवाई टाल दी। याचिका में मुंबई पुलिस द्वारा 10 और 11 अक्टूबर 2026 को अगस्त क्रांति मैदान और शिवाजी पार्क में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिका में दावा किया है कि उन छात्रों को निशाना बनाया गया, जो जुलाई 2026 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे? उन्हें उनके घरों से उठाया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट उन मामलों को रद्द कर दिया है। किसी व्यक्ति के खिलाफ सिर्फ किसी से जुड़ाव, पहले हिरासत में लिए जाने, किसी लिस्ट में नाम होने या सार्वजनिक जगह पर मौजूद होने के आधार पर जबरदस्ती कार्रवाई नहीं की जा सकती। जब तक कि इसके लिए कोई कानूनी और व्यक्तिगत आधार न हो। हटाए जा चुके रिकॉर्ड के आधार पर छात्रों पर कार्रवाई करना भेदभावपूर्ण है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, पैदल चलने वालों और बिना किसी कानूनी व्यक्तिगत कारण के पकड़े गए लोगों को हिरासत में लेने को असंवैधानिक घोषित करने का निर्देश दिया जाए। इसमें पुलिस की ज्यादतियों की स्वतंत्र जांच, सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिसिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने की भी मांग की गई है।

Created On :   13 Oct 2026 9:53 PM IST

Tags

Next Story