कामकाज प्रभावित: शिंदे-सुनेत्रा पवार समेत कई मंत्रियों को लगभग एक महीने बाद भी नहीं मिला नया स्टाफ

शिंदे-सुनेत्रा पवार समेत कई मंत्रियों को लगभग एक महीने बाद भी नहीं मिला नया स्टाफ
  • फडणवीस ने निर्धारित प्रक्रिया के बिना नियुक्त करीब 550 कर्मचारियों को मूल विभागों में भेजने का दिया था आदेश
  • सीएमओ की समीक्षा के बाद हुई थी कार्रवाई

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र की महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रियों के कार्यालयों में निर्धारित प्रक्रिया के बिना काम कर रहे कर्मचारियों को मूल विभागों में वापस भेजे जाने के करीब एक महीने बाद भी एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार समेत कई मंत्रियों को उनके बदले नए कर्मचारी नहीं मिले हैं। इससे मंत्रियों के कार्यालयों के रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ रहा है। शिंदे के विभाग के एक अधिकारी ने 'दैनिक भास्कर' को बताया कि उनके करीब एक दर्जन कर्मचारियों को हटाकर मूल विभाग में भेज दिया गया था, लेकिन अब तक उनके स्थान पर नए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है। इस अधिकारी के मुताबिक, इस मामले में जल्द ही मुख्य सचिव को दोबारा अवगत कराया जाएगा। हालांकि, नए कर्मचारियों की नियुक्ति में देरी की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

सीएमओ की समीक्षा के बाद हुई थी कार्रवाई

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की समीक्षा के बाद मंत्रालय में मंत्रियों के कार्यालयों में निर्धारित प्रक्रिया के बिना काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके मूल विभागों में लौटाने का निर्णय लिया गया था। इनमें निजी सहायक (पीए), विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) और निजी सचिव स्तर के कर्मचारी भी शामिल थे। इस कार्रवाई का असर भाजपा के साथ शिवसेना (शिंदे) और राकांपा (अजित) के मंत्रियों पर भी पड़ा था। पिछले महीने सामान्य प्रशासन विभाग ने अनधिकृत तरीके से की गई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी किया था। कर्मचारियों को 10 सितंबर तक अपने मूल विभागों में लौटने का निर्देश दिया गया था। आदेश का पालन नहीं करने पर वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई थी।

अब मुख्यमंत्री की मंजूरी के बिना नियुक्ति नहीं

नई व्यवस्था के तहत मंत्री अब अपनी पसंद से अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। किसी मंत्री को अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत होने पर प्रस्ताव मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास भेजना होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद ही नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य मंत्रियों के कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और अनौपचारिक नियुक्तियों पर रोक लगाना है। हालांकि, नए कर्मचारियों की तैनाती में देरी से मंत्रियों के सामने कामकाज संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।

904 पद मंजूर, करीब 550 कर्मचारी अनौपचारिक तरीके से कर रहे थे काम

मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 40 मंत्री कार्यालयों के लिए कुल 904 अस्थायी पद मंजूर किए थे। इनमें मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए 164, दोनों उप मुख्यमंत्रियों के कार्यालयों के लिए 72-72, कैबिनेट मंत्रियों के लिए 16-16 और राज्य मंत्रियों के लिए 14-14 पद निर्धारित किए गए थे। समीक्षा के दौरान 549 पद नियमित प्रक्रिया के तहत भरे हुए पाए गए थे जबकि करीब 550 कर्मचारी अलग-अलग अनौपचारिक माध्यमों से मंत्रियों के कार्यालयों में काम कर रहे थे। इन कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद कई कार्यालयों में स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है।

Created On :   13 Oct 2026 10:15 PM IST

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