तीन पीढ़ियां, एक सपना Part 4: 1977 से आज तक; धीरूभाई से आकाश अंबानी तक 3 पीढ़ियों ने कैसे बदली रिलायंस की कहानी

1977 से आज तक; धीरूभाई से आकाश अंबानी तक 3 पीढ़ियों ने कैसे बदली रिलायंस की कहानी
‘डिजिटल गुजरात ना प्रणेता’ के रूप में आकाश अंबानी के नेतृत्व में जियो की अगली पारी, एक परिवार, उसके निवेशकों और गुजरात के बीच करीब 50 साल पुराने रिश्ते को नए अध्याय तक ले जा रही है।

तीसरे भाग में हमने देखा कि कैसे एक पारिवारिक बातचीत से जियो की शुरुआत की कहानी जुड़ी। इस अंतिम भाग में नजर तीसरी पीढ़ी पर है और उस सफर पर, जो एक बार फिर गुजरात से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

किसी बड़े कारोबारी परिवार की हर पीढ़ी के सामने एक सवाल होता है—वह ऐसा क्या बनाएगी, जिसकी अपनी अलग पहचान हो?

धीरूभाई अंबानी के लिए इसका जवाब साहस और आम निवेशकों की भागीदारी पर आधारित औद्योगिक साम्राज्य था। मुकेश अंबानी के लिए यह भारत में पहले कभी नहीं देखे गए पैमाने पर कारोबार का विस्तार था। वहीं, आकाश अंबानी के लिए यह जियो है, जिसके जरिए तकनीक और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है।

गुजरात के हर कोने तक कनेक्टिविटी

गुजरात उन राज्यों में शामिल रहा है, जहां जियो के विस्तार का प्रभाव देखने को मिला। मूल लेख के अनुसार, वर्ष 2022 के अंत में जियो गुजरात के सभी 33 जिला मुख्यालयों तक 5G कनेक्टिविटी पहुंचाने वाला पहला ऑपरेटर बना। इससे शहरों, कस्बों और गांवों में तेज इंटरनेट के नए अवसर खुले।

तेज इंटरनेट ने विद्यार्थियों, किसानों, उद्यमियों और छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ाईं।

इंटरनेट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की इसी सोच के कारण आकाश अंबानी को लेख में ‘डिजिटल गुजरात ना प्रणेता’, यानी डिजिटल रूप से जुड़े और सशक्त गुजरात का अग्रदूत, कहा गया है।

भारत को जोड़ने से दुनिया के लिए तकनीक बनाने तक

आकाश अंबानी के नेतृत्व में जियो का कारोबार केवल टेलीकॉम सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। मूल लेख के मुताबिक, अपने पहले दशक में जियो भारत में 52 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ दुनिया के बड़े मोबाइल कनेक्टिविटी कारोबारों में शामिल हो गया।

अब कंपनी की महत्वाकांक्षाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड सेवाएं, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और स्वदेशी तकनीक जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।

अगला लक्ष्य केवल भारत को दूसरे देशों में विकसित तकनीक से जोड़ना नहीं, बल्कि भारत में ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में हो सके।

तीन पीढ़ियों की इस यात्रा को देखें तो हर पीढ़ी ने एक अलग चुनौती स्वीकार की। पहली पीढ़ी ने इस धारणा को चुनौती दी कि बड़े कारोबार केवल स्थापित कारोबारी परिवार ही बना सकते हैं। दूसरी पीढ़ी ने भारतीय कंपनियों के विस्तार की सीमाओं को चुनौती दी। तीसरी पीढ़ी इस सोच को बदलने की कोशिश कर रही है कि भारत को हमेशा दूसरों की बनाई तकनीक का उपभोक्ता बनकर रहना चाहिए।

महत्वाकांक्षा वही है, लेकिन उसे पूरा करने का तरीका बदल गया है।

शेयर बाजार से फिर जुड़ती कहानी

1977 में धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस को शेयर बाजार से जोड़ा था। करीब आधी सदी बाद, मूल लेख के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग की तैयारी के संदर्भ में चर्चा में है।

यहां गुजरात की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का पंजीकृत कार्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी की सेवाएं पूरे भारत में फैली हैं और उसकी महत्वाकांक्षाएं वैश्विक बाजारों तक पहुंचने की हैं, लेकिन उसका कॉर्पोरेट आधार गुजरात से जुड़ा है।

जिस राज्य ने रिलायंस को नरोदा की एक टेक्सटाइल मिल से वैश्विक कारोबारी समूह बनते देखा, उसके लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक जुड़ाव है।

जिस कहानी की शुरुआत एक गुजराती उद्यमी द्वारा आम भारतीयों को औद्योगिक प्रगति में हिस्सेदार बनने का अवसर देने से हुई थी, वह अब एक नए पूंजी बाजार के पड़ाव की ओर बढ़ती दिखाई देती है। इस बार कारोबार का केंद्र टेक्सटाइल या पेट्रोलियम नहीं, बल्कि तीसरी पीढ़ी के नेतृत्व में आगे बढ़ता डिजिटल और तकनीकी प्लेटफॉर्म है।

1977 में सवाल था कि क्या आम भारतीय पहली पीढ़ी के एक उद्यमी पर भरोसा करेंगे। करीब 50 साल बाद सवाल यह है कि क्या अगली पीढ़ी तकनीक के माध्यम से मूल्य निर्माण का नया अध्याय लिख पाएगी, जैसा पिछली पीढ़ियों ने उद्योग के क्षेत्र में किया था।

इसका जवाब आने वाले वर्षों में जियो के कारोबार के विकास और उसकी रणनीति से सामने आएगा।

गुजरात की विकास यात्रा का हिस्सा बनने की कहानी

गुजरात की विकास यात्रा को तीन पीढ़ियों ने अलग-अलग तरीकों से प्रभावित किया है।

धीरूभाई अंबानी, जिन्हें इस लेख में ‘औद्योगिक गुजरात ना नाथ’ कहा गया है, ने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर लाखों आम लोगों को भारत की औद्योगिक प्रगति में हिस्सेदारी का अवसर दिया।

मुकेश अंबानी, जिन्हें ‘नवयुग गुजरात ना शिल्पी’ कहा गया है, ने इस आधार पर बड़े पैमाने पर विस्तार किया। जामनगर को वैश्विक ऊर्जा केंद्र बनाने के साथ उन्होंने रिटेल, टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी रिलायंस की मौजूदगी बढ़ाई।

आकाश अंबानी, जिन्हें ‘डिजिटल गुजरात ना प्रणेता’ कहा गया है, ऐसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने इंटरनेट को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जरूरत के रूप में देखा और किफायती कनेक्टिविटी को अधिक लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया।

समय के साथ साधन बदलते गए—शेयरों से रिफाइनरी तक और फिर डेटा व डिजिटल सेवाओं तक। लेकिन मूल विचार नहीं बदला: भारत की प्रगति तब अधिक व्यापक होती है, जब आम लोगों को भी उसका हिस्सा बनने का अवसर मिलता है।

गुजरात इस परिवार की कारोबारी यात्रा के साथ कदम से कदम मिलाकर चला है। अब इस कहानी का अगला अध्याय केवल देखने का नहीं, बल्कि इसमें अपनी भूमिका तलाशने का भी है।

निवेश संबंधी महत्वपूर्ण सूचना: कंपनी की विरासत और पिछले शेयरधारक रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले संबंधित ऑफर डॉक्यूमेंट, कारोबारी बुनियाद, मूल्यांकन, विकास की संभावनाओं और जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।

Created On :   13 Oct 2026 7:26 PM IST

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