उठे सवाल: आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता को लेकर विवाद, 10 सीटी बाद भी नहीं पकी सब्जी

आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता को लेकर विवाद, 10 सीटी बाद भी नहीं पकी सब्जी
  • कुकर की 10 सीटी बाद भी नहीं पकी आगनवाडी की मटर की सब्जी
  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता को लेकर विवाद

Mumbai News. महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जा रहे अनाज की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने वीडियो पोस्ट कर दावा किया था कि अनाज के नहीं पकने के कारण बच्चों के पेट में दर्द हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा था कि मटर की क्वालिटी इतनी खराब है कि कुकर की 9-10 सीटी बाद भी यह पीली मटर पकती नहीं और जब इसे बच्चे खाते हैं तो उनका पेट दर्द करने लगता है। हालांकि इसके बाद उस आगनवाडी कार्यकर्ता को निलंबित कर दिया गया। मामले पर सत्तारूढ़ राकांपा के विधायक दिलीप वलसे पाटिल ने राज्यभर में अनाज की गुणवत्ता संबंधी खामियां होने की बात स्वीकार की। वहीं विपक्ष ने कार्यकर्ता के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें केवल पुणे जिले के आंबेगांव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों से भी ऐसी ही शिकायतें सामने आई हैं। पाटिल पुणे जिले की आंबेगांव विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को सीधे संबंधित विभाग के सचिव और मंत्री के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी और उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पाटिल ने कहा, "सबसे पहले संबंधित ठेकेदार और खाद्यान्न की गुणवत्ता की जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।" राकांपा (शरद) के लोकसभा सदस्य अमोल कोल्हे ने मामले पर प्रशासन की प्रतिक्रिया की आलोचना की। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। कोल्हे ने कहा, "यह ऐसा मामला है जिसमें चोर को छोड़ दिया गया और निर्दोष को सजा दी गई। कोल्हे ने कहा कि यह मामला पूरे महाराष्ट्र में व्याप्त एक बड़ी समस्या को दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में जुन्नर तहसील में हुई एक घटना का हवाला दिया, जहां बच्चों के दोपहर के भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और मिर्च पाउडर में मिलावट पाई गई थी। इस बीच, राकांपा (शरद) के विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय रेशमा पारधी को निलंबन का नोटिस जारी किए जाने पर सरकार की आलोचना की। पवार ने आरोप लगाया, "रेशमा पारधी ने इस मामले को उजागर किया, इसके लिए उनकी सराहना करने के बजाय सरकार ने उन्हें निलंबित करने का फैसला किया।" उन्होंने पारधी का निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की और खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं की 10 दिनों के भीतर पूरी जांच कराने की मांग की।


Created On :   21 Aug 2026 9:53 PM IST

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