कार्यप्रणाली पर सवाल: राज्य का उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग संस्कृत भाषा पुरस्कारों को लेकर उदासीन, तय समय-सारणी का पालन नहीं

राज्य का उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग संस्कृत भाषा पुरस्कारों को लेकर उदासीन, तय समय-सारणी का पालन नहीं
  • 2021 से पांच साल के पुरस्कार लंबित
  • 2026 की प्रक्रिया भी अभी नहीं हुई शुरू
  • सात पुरस्कार राज्य से, एक अन्य राज्यों से
  • महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार

Mumbai News. संस्कृत भाषा के अध्ययन, अध्यापन, लेखन, शोध और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले ‘महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’ को लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2021 से 2025 तक के पुरस्कार अब तक लंबित हैं, जबकि वर्ष 2026 के पुरस्कार की प्रक्रिया भी अभी तक शुरू नहीं हुई है। सरकार के निर्णय के अनुसार यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष संस्कृत दिवस यानी नारियल पूर्णिमा के अवसर पर प्रदान किया जाना चाहिए। हालांकि, पुरस्कार योजना शुरू होने के बाद से अब तक एक बार भी निर्धारित समय पर पुरस्कार नहीं दिए गए। ऐसे में विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस समय में राज्य में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री भाजपा नेता चंद्रकांत पाटील हैं।

सात पुरस्कार राज्य से, एक अन्य राज्यों से

पुरस्कार के तहत प्राचीन संस्कृत पंडित, वेदमूर्ति, संस्कृत शिक्षक एवं अन्य श्रेणी में दो, संस्कृत प्राध्यापक वर्ग में दो तथा संस्कृत कार्यकर्ता के लिए एक पुरस्कार दिया जाता है। इसके अलावा अन्य राज्यों से भी एक पुरस्कार प्रदान किया जाता है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 25 हजार रुपये नकद, प्रमाणपत्र, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया जाता है। लेकिन विभाग की ओर से इन पुरस्कारों को लेकर हमेशा से ही उदासीनता बनी रहती है। वर्ष 2013 और 2014 के पुरस्कार वर्ष 2015 में एक साथ दिए गए थे। इसके बाद वर्ष 2015 से 2020 तक के छह वर्षों के पुरस्कार वर्ष 2021 में एक साथ प्रदान किए गए। अब 2021 से 2025 तक के पांच वर्षों के पुरस्कार लंबित हैं।

तय समय-सारणी का पालन नहीं

सरकार द्वारा पुरस्कार प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सारणी तय की गई है। 1 अप्रैल तक विज्ञापन, 2 से 30 अप्रैल तक आवेदन, 15 मई तक आवेदनों की जांच और 25 मई तक सरकार को सिफारिश भेजने का प्रावधान है। जून में चयन समिति की बैठक और 1 से 15 जुलाई के बीच पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की जानी है। इसके बाद संस्कृत दिवस पर पुरस्कार वितरण होना चाहिए। लेकिन व्यवहार में इस समय-सारिणी का पालन नहीं हो रहा है। संस्कृत जैसी प्राचीन एवं समृद्ध भारतीय भाषा के पुरस्कार वर्षों तक लंबित रहना भाषा के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है।

Created On :   20 Aug 2026 8:47 PM IST

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