दलील: शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह मामल में कामत बोले - सुप्रीम कोर्ट के पास विधायकों को अयोग्य ठहराने का अधिकार

शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह मामल में कामत बोले - सुप्रीम कोर्ट के पास विधायकों को अयोग्य ठहराने का अधिकार
  • चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ मामले पर गुरुवार को को भी सुनवाई हुई
  • विशेष परिस्थितियों में विधायक को अयोग्य ठहरा सकता है

New Delhi News. सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ मामले पर गुरुवार को को भी सुनवाई हुई। इस दौरान उद्धव गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष के पास ही विधायक को अयोग्य ठहराने का अधिकार है, बल्कि विशेष परिस्थितियों में विधायक को अयोग्य ठहरा सकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हमारे पास विधायक को अयोग्य ठहराने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को अहम माना जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ के समक्ष उद्धव गुट का पक्ष रखते हुए कामत ने कहा कि अगर विधानसभा अध्यक्ष विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में फैसला नहीं ले पाते हैं, तो कोर्ट दखल दे सकता है। उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले नगर निगमों में पार्षदों को अयोग्य ठहराने के बारे में फैसला दिया था। कोर्ट ने राजेंद्र सिंह के मामले में साफ कर दिया है कि विधानसभा अध्यक्ष को 10वीं अनुसूची के प्रभाव को खत्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि शिवसेना मामले में कोर्ट को यह तय कर लेना चाहिए कि अलग हुए गुट के विधायक दल बदल कर गए थे या नहीं। कामत ने कहा कि अगर यह साफ है कि विधायक दल बदल कर गए थे, तो चुनाव आयोग ने उन्हें चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ देते समय जो आधार बताए थे, उनमें से एक खत्म हो जाएगा।

कामत ने कहा कि जब किसी राजनीतिक पार्टी में फूट होती है, तो यह मुद्दा उठता है कि चुनाव चिन्ह किसका होगा। इस मामले में राजनीतिक पार्टी के रूप में हमारा बहुमत था। इस बारे में कोर्ट में दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं। शिवसेना (उद्धव) के 19 लाख से ज़्यादा सदस्य हैं जबकि शिंदे गुट के सिर्फ़ 4 लाख सदस्य हैं। कामत ने अपनी दलील में कहा कि चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था है जो ट्रिब्यूनल की तरह काम करती है। यह इंसाफ़ देने वाली सबसे बड़ी संस्था नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि चुनाव चिन्ह पर फैसला करते समय सिर्फ़ विधायकों की संख्या पर विचार किया गया था। हमें विधानसभा अध्यक्ष पर भरोसा नहीं है, इसलिए कोर्ट को राहत देने की ज़रूरत है।

Created On :   20 Aug 2026 8:29 PM IST

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