बॉम्बे हाई कोर्ट: मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध लॉ कॉलेजों को मिली बड़ी राहत, नाम एवं नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता मंजूरी प्राप्त सूची में शामिल करने का निर्देश

मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध लॉ कॉलेजों को मिली बड़ी राहत, नाम एवं नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता मंजूरी प्राप्त सूची में शामिल करने का निर्देश
  • अदालत के आदेश स्वीकृत लॉ कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में प्रशासनिक बाधा से बचाना
  • अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशालय को लॉ कॉलेजों के नाम एवं नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता को ‘मंजूरी प्राप्त सूची’ में शामिल करने का दिया निर्देश

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट से मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध लॉ कॉलेजों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशालय को लॉ कॉलेजों के नाम एवं नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता को ‘मंजूरी प्राप्त सूची’ में शामिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश स्वीकृत लॉ कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में प्रशासनिक बाधा से बचाने के लिए जारी किया है। न्यायमूर्ति आर. आई. चागला एवं न्यायमूर्ति फिरदौस पी. पूनिवाला की पीठ ने श्री हरि एजुकेशनल ट्रस्ट समेत मुंबई विश्वविद्यालय से जुड़े कई लॉ कॉलेजों की याचिकाओं पर कहा कि जिन याचिकाकर्ता लॉ कॉलेजों को मुंबई विश्वविद्यालय ने संबद्धता जारी रखने की स्वीकृति प्रदान की है, उन्होंने इन स्वीकृतियों को उच्च शिक्षा निदेशालय से कॉलेज की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए अपने लॉगिन के माध्यम से अपलोड कर दिया है। पुणे स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय ने उन स्वीकृत लॉ कॉलेजों के नाम तथा उनकी नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता को अपनी ‘मंजूरी प्राप्त सूची’ में शामिल नहीं किया है। इसके कारण राज्य सीईटी सेल अपने आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी प्राप्त नहीं कर पा रहा है। पीठ ने उच्च शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिया कि 14 अगस्त 2026 के इस न्यायालय के आदेश के आधार पर स्वीकृति प्राप्त करने वाले याचिकाकर्ता लॉ कॉलेजों के नाम अभी तक ‘मंजूरी प्राप्त सूची’ में शामिल नहीं किए गए हैं, तो उन्हें तत्काल उस अपडेटेड सूची में शामिल किया जाए। साथ ही उनकी नवीनतम स्वीकृत प्रवेश क्षमता भी सूची में दर्शाई जाए, जिससे राज्य सीईटी सेल सीएपी प्रवेश प्रक्रिया के लिए अपडेट आंकड़े प्राप्त कर सके।

क्या है पूरा मामला

मुंबई विश्वविद्यालय ने कॉलेजों पर आखिरी समय में कार्रवाई करते हुए अध्यापक और प्रधानाध्यापक की ‘मंजूरी न मिलने' को कमी माना और 2026–27 के एडमिशन से ठीक पहले सीटों में 50 फीसदी कटौती कर दी थी और 10 लाख रुपए जुर्माना लगा दिया था। जबकि उनका दावा है कि सभी फैकल्टी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के योग्यता नियमों को पूरा करते हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

Created On :   18 Aug 2026 9:11 PM IST

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