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नया शासनादेश: सरकारी विभागों में आईटी सलाहकार नियुक्ति पर नकेल, अब मनमाने तरीके से नहीं कर सकेंगे नियुक्त

Mumbai News. प्रदेश सरकार के सूचना व प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग ने मंत्रालय के सरकारी विभागों में आईटी सलाहकारों की नियुक्ति के लिए सीमा निर्धारित कर दिया है। इससे 1 मई 2026 के बाद मंत्रालय के सरकारी विभागों और संबंधित कार्यालयों में अधिकतम दो आईटी सलाहकार नियुक्त किए जा सकेंगे। फिलहाल जिन सरकारी विभागों में दो से अधिक आईटी सलाहकार कार्यरत हैं। उनकी सेवाएं केवल 30 अप्रैल तक शुरू रखी जा सकेंगी। प्रदेश के सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार के बाद कड़ी नाराजगी के बाद विभाग ने नियमों में संशोधन किया है। नए शासनादेश के अनुसार आईटी सलाहकारों की नियुक्ति की सीमा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय के लिए लागू नहीं करेगी। सरकार के इस आदेश का कड़ाई से पालन के लिए जिम्मेदारी संबंधित विभाग के प्रमुख पर होगी। वहीं नॉन आईटी कामों के लिए सरकारी विभागों, महामंडलों और प्राधिकरणों को परियोजना सलाहकार नियुक्त करने की छूट रहेगी।
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बीते अक्टूबर में नियुक्त थे 246 आईटी सलाहकार
प्रदेश के मंत्री शेलार ने 2 अक्टूबर 2025 को बैठक लेकर सरकारी विभागों में आईटी सलाहकार नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए थे। शेलार ने कहा था कि मंत्रालय के विभिन्न विभागों में कार्यरत आईटी सलाहकारों की सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग के छह इंपैनल्ड एजेंसी के जरिए नियुक्त होती है। इन सलाहकारों को संबंधित विभाग की ओर से वेतन दिया जाता है। राज्य के विभिन्न विभागों में इंपैनल्ड एजेंसी के जरिए 246 व्यक्ति आईटी सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन इन सलाहकारों के काम, मानधन और अन्य जानकारी महाआईटी के पास जमा नहीं की जाती है। लेकिन सुपरवाइजरी के नाम पर सलाहकार विभिन्न विभागों से चार से पांच गुना ज्यादा वेतन लेते हैं। इससे सरकार के राजस्व का नुकसान होता है। शेलार ने स्पष्ट कहा था कि सरकारी धन की इस तरह की लूट उचित नहीं है।
Created On :   2 April 2026 7:59 PM IST







