Mumbai News: कर्मचारी ने कोई धोखाधड़ी नहीं की हो, तो केवल तकनीकी आधार पर पेंशन लाभ नहीं रोका जा सकता - कोर्ट

कर्मचारी ने कोई धोखाधड़ी नहीं की हो, तो केवल तकनीकी आधार पर  पेंशन लाभ नहीं रोका जा सकता - कोर्ट
  • अदालत ने सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और रिटायरमेंट लाभ देने का दिया आदेश
  • 33 साल तक सर्विस करने के बाद 31 अगस्त 2025 को शिक्षिका हुई सेवानिवृत्त

Mumbai News बॉम्बे हाई कोर्ट ने जिला परिषद विद्यालय से सेवानिवृत्त शिक्षिका को पेंशन और रिटायरमेंट लाभ देने को लेकर अपने आदेश में कहा कि यदि कर्मचारी ने कोई धोखाधड़ी नहीं की हो और लंबे समय तक (33 वर्ष) सेवा दी हो, तो केवल तकनीकी आधार पर उसके पेंशन लाभ नहीं रोके जा सकते। वह पेंशन लाभों की हकदार हैं। अदालत ने 30 दिनों में राज्य सरकार को सेवानिवृत्त शिक्षिका को पेंशन और रिटायरमेंट लाभ देने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति अभय जे. मंत्री की पीठ ने जिला परिषद विद्यालय से सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षिका संध्या श्रीकांत परदेशी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि हमें याचिकाकर्ता की ओर से किसी भी प्रकार के छल, मिथ्या-कथन अथवा कपट का कोई तत्व परिलक्षित नहीं होता है। उन्होंने अपने पति की सामाजिक स्थिति के आधार पर कभी भी ‘वैधता प्रमाण पत्र' का दावा नहीं किया है। उनके नियुक्ति आदेश में भी किसी भी प्रकार से यह संकेत नहीं मिलता है कि उनकी नियुक्ति किसी ऐसे पद पर की गई थी, जो भटक्या जमाती (एनटी) (बी) की श्रेणी अथवा किसी अन्य आरक्षित श्रेणी के लिए आरक्षित था। अभिलेखों से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि जिला परिषद ने याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति तक उनसे कभी भी ‘वैधता प्रमाण पत्र' प्रस्तुत करने की अपेक्षा नहीं की।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने एक शासनादेश (जीआर) जारी किया था, जिसके तहत विवाहित महिलाओं को अपने पति की जाति या जनजाति के आधार पर उपलब्ध किसी भी आरक्षण का लाभ उठाने की अनुमति दी गई थी। वर्ष 1996 में उस लाभ को वापस ले लिए गए थे। राज्य सरकार और जिला परिषद द्वारा भी ऐसा कोई जीआर हमारे समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। हमारी राय में अब उस जीआर का कोई महत्व नहीं रह जाता है, भले ही वह कभी अस्तित्व में रहा हो।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सितंबर 1992 से अपनी सेवाकाल में 33 वर्षों तक कार्य किया है। उनकी सेवा पुस्तिका में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि उनकी नियुक्ति के समय उन्हें किसी आरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया था। यदि यह मान भी लिया जाए कि 1996 के बाद उनकी सामाजिक स्थिति ‘खुली श्रेणी' के अंतर्गत आती है, तब भी उन्होंने 29 वर्षों तक ‘खुली श्रेणी' में ही कार्य किया है और अपने पति के एनटी (बी) श्रेणी से संबंधित होने के आधार पर आरक्षित श्रेणी के लिए उपलब्ध किसी भी सेवा-लाभ को प्राप्त नहीं किया है।

क्या था पूरा मामला : याचिकाकर्ता संध्या पारदेशी एक प्राथमिक शिक्षिका थीं, जिन्होंने 1992 में नियुक्ति प्राप्त की। उनका जन्म ‘खुली श्रेणी' में हुआ था। जबकि विवाह के बाद उनके पति एनटी (बी) श्रेणी से थे। नियुक्ति के समय यह मान लिया गया कि वह एनटी (बी) आरक्षित श्रेणी से हैं। उन्होंने लगभग 33 वर्षों तक सेवा की और 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त हुईं। सेवानिवृत्ति के बाद उनका पेंशन और रिटायरमेंट लाभ रोक दिया गया, क्योंकि जाति पिता से निर्धारित होती है, पति से नहीं।


Created On :   31 March 2026 7:38 PM IST

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