शून्यकाल: मेधा ने कहा - कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता, कृषि भूमि संरक्षण की मांग उठाई

मेधा ने कहा - कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता, कृषि भूमि संरक्षण की मांग उठाई
  • शून्यकाल में कृषि भूमि के संरक्षण की मांग उठाई
  • कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता

New Delhi News. भाजपा सांसद डॉ मेधा कुलकर्णी ने कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण का मुद्दा उठाते हुए इसे खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में खेती योग्य भूमि का घटता प्रतिशत चिंताजनक है। 140 करोड़ नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो कृषि भूमि का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस विषय को उठाते हुए डॉ मेधा कुलकर्णी ने कहा कि देश के कई जिलों और शहरों में कृषि भूमि की प्लॉटिंग कर आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे कृषि योग्य क्षेत्र में लगातार कमी आ रही है। पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को गैर-कृषि घोषित किया गया है। वर्तमान में भारत में केवल लगभग 45 प्रतिशत भूमि ही खेती के अंतर्गत है, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह स्थिति जारी रही तो खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका, जीएसटी राजस्व और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक अध्ययन के अनुसार, जनसंख्या में 1 प्रतिशत वृद्धि होने पर कृषि क्षेत्र में 0.45 प्रतिशत की कमी आती है।

कुलकर्णी ने किसानों से अपील की कि वे अपनी कृषि भूमि को संरक्षित रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करें। उन्होंने सरकार से मांग की कि उपजाऊ भूमि के संरक्षण के लिए कठोर कानून लागू किए जाएं तथा भूमि उपयोग में हो रहे बदलावों पर सैटेलाइट और डिजिटल तकनीक के माध्यम से निगरानी रखी जाए।

Created On :   30 March 2026 8:03 PM IST

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