बॉम्बे हाई कोर्ट: सड़क दुर्घटना में मारे गए डॉ. भूपेंद्र कोठाडिया की पत्नी को 34 लाख रुपए बीमा कंपनी को दिया निर्देश

सड़क दुर्घटना में मारे गए डॉ. भूपेंद्र कोठाडिया की पत्नी को 34 लाख रुपए बीमा कंपनी को दिया निर्देश
  • नासिक के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मृतक के आश्रितों को 16 रुपए दिया था मुआवजा
  • डॉ. भूपेंद्र कोठाडिया की पत्नी को 34 लाख रुपए बीमा कंपनी को दिया निर्देश

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मारे गए डॉ. भूपेंद्र कोठाडिया की पत्नी को 34 लाख रुपए से अधिक देने का बीमा कंपनी को निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आश्रितों को वास्तविक और न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए और मुआवजे पर ब्याज दावा याचिका दाखिल होने की तारीख से देना होगा। नासिक के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मृतक की पत्नी समेत आश्रितों को 16 लाख 80 हजार 910 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने डॉ. अनघा भूपेन्द्र कोठाडिया की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम एक सामाजिक कल्याण कानून है, जिसका उद्देश्य मृतक के आश्रितों को "उचित’ देना है। जबकि आयकर अधिनियम का उद्देश्य केवल कर की गणना करना है। इसलिए आयकर कानून के प्रावधानों को बिना सोचे-समझे मुआवजा तय करने में लागू नहीं किया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि मृतक ने मकान खरीदने के लिए होम लोन लिया था, तो उसके ब्याज को आयकर कानून में भले ही कटौती मिलती हो, लेकिन इससे आश्रितों की वास्तविक आर्थिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। इसलिए होम लोन के ब्याज को मृतक की आय से घटाकर मुआवजा कम नहीं किया जा सकता है।

न्यायाधिकरण ने ब्याज केवल उस दिन से दिया था जब सही बीमा कंपनी को पक्षकार बनाया गया। पीठ ने इसे गलत माना और कहा कि धारा 171 मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार ब्याज दावा याचिका दायर होने की तारीख से मिलना चाहिए, न कि बीमा कंपनी को बाद में पक्षकार बनाए जाने की तारीख से। पीठ ने न्यायाधिकरण का आदेश संशोधित करते हुए मुआवजे की पुनर्गणना की और आश्रितों को 17 लाख 58 हजार 465 रुपए अतिरिक्त मुआवजा और साथ ही दावा याचिका की तारीख से ब्याज देने का आदेश दिया। बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आठ सप्ताह के भीतर पूरी राशि जमा करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला

डॉ. भूपेंद्र कोठाडिया की नासिक में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 30 मार्च 2012 को उनके आश्रितों को 16 लाख 80 हजार 910 रुपए का मुआवजा दिया था। आश्रितों ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए न्यायाधिकरण के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और मुआवजे में वृद्धि का अनुरोध किया था।

Created On :   14 July 2026 7:57 PM IST

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