खुफिया जांच: मनोज जरांगे के सहयोगियों के मनी ट्रेल की ईडी जांच शुरू, आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों से मांगा गया ब्योरा

मनोज जरांगे के सहयोगियों के मनी ट्रेल की ईडी जांच शुरू, आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों से मांगा गया ब्योरा
  • टी-1 जांच की प्रक्रिया और दायरा
  • आंदोलन का खर्च, सरकारी ठेके व रेत कारोबार जांच के घेरे में

डिजिटल डेस्क, मुंबई. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे-पाटील से जुड़े व्यक्तियों के कथित वित्तीय लेन-देन की उच्च स्तरीय खुफिया जांच शुरू कर दी है। ईडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार एजेंसी ने आयकर विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों से जांच के दायरे में आए लोगों से संबंधित शिकायतों या किसी भी प्रासंगिक सामग्री की जानकारी मांगी है। वर्तमान में टी-1 खुफिया स्तर के रूप में वर्गीकृत यह जांच एजेंसी को मिली शिकायतों के बाद शुरू की गई है। ईडी ने शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर लिए हैं और उनके आरोपों को साबित करने के लिए दस्तावेज व सबूत मांगे हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस जांच की पुष्टि की है।

एजेंसी जिन शिकायतों की जांच कर रही है उनमें बीड के सामाजिक कार्यकर्ता अमोल सुखदेव खुणे की शिकायत भी शामिल है। जो 24 अगस्त 2026 को ईडी के मुंबई जोन-II कार्यालय में प्राप्त हुई थी। इस शिकायत में जरांगे और उनके चार अन्य सहयोगियों से जुड़ी कथित बेहिसाबी संपत्ति, संदिग्ध बेनामी संपत्तियों, सरकारी ठेकों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की मांग की गई है।

टी-1 जांच की प्रक्रिया और दायरा

ईडी अधिकारियों के अनुसार टी-1 जांच एक प्रारंभिक खुफिया जांच है जो शिकायतों के आधार पर शुरू की जाती है। इस चरण में एजेंसी केवल आरोपों का परीक्षण करती है, बयान दर्ज करती है ताकि यह आकलन किया जा सके कि आगे की जांच आवश्यक है या नहीं। वहीं टी-2 जांच सरकारी एजेंसियों या विभागों से मिली शिकायतों के आधार पर शुरू की जाती है। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अब तक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) या औपचारिक मनी-लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज नहीं किया गया है।

आंदोलन का खर्च, सरकारी ठेके व रेत कारोबार जांच के घेरे में

शिकायत बड़े स्तर पर मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े वाहनों, यात्रा, आवास, भोजन, रैलियों, मंच व्यवस्था, प्रचार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर हुए खर्चों के सत्यापन की पर आधारित है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन, सिंचाई विभाग, जिला परिषदों और जल जीवन मिशन के तहत पिछले 10 वर्ष में जरांगे के सहयोगियों व उनसे जुड़ी फर्मों को मिले सरकारी ठेकों के सत्यापन का अनुरोध किया गया है।

Created On :   30 Sept 2026 9:54 PM IST

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