आपबीती: 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे मुंबई के शिक्षक ने सुनाई आपबीती, कहा - फर्जीवाड़े का शक नहीं हुआ, मैंने 90 लाख भेज दिए

12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे मुंबई के शिक्षक ने सुनाई आपबीती, कहा - फर्जीवाड़े का शक नहीं हुआ, मैंने 90 लाख भेज दिए
  • एफडी तुड़वाकर भेज दी जमापूंजी
  • डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई नियम नहीं है

डिजिटल डेस्क, मुंबई, दिवाकर सिंह. डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई नियम नहीं है। लेकिन इसका डर दिखाकर ठगी हो रही है। मालाड (मुंबई) निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक संतानो अलेक्ज़ेंडर अंद्रादे (72) के साथ भी ऐसा हुआ। अब जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने आगे आकर दैनिक भास्कर को आपबीती सुनाई है, ताकि दूसरे लोग इसका शिकार न हों। सुनिए उन्हीं की जुबानी।

अगस्त 2026 के आखिरी हफ्ते की बात है। मुझे व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। पुलिस वर्दी पहने व्यक्ति ने खुद को नाशिक का पुलिस अधिकारी बताया। कहा कि तुम्हारे एटीएम कार्ड से आतंकवादियों के साथ करोड़ों का अवैध लेन-देन हुआ है। एनआईए का गिरफ्तारी वारंट निकला है। तुम्हें डिजिटल अरेस्ट किया जाता है।

फिर उसने व्हाट्सएप पर सुप्रीम कोर्ट, ईडी और नाशिक पुलिस के मुहर लगे दस्तावेज भेजे। इनमें मेरा नाम था। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप थे। मुझे फर्जीवाड़े का जरा भी शक नहीं हुआ।


यह भी पढ़े -मुंबई चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, भाई जगताप बोले- जारी रहेगी लड़ाई

वो खौफनाक 12 दिन

मैं 12 दिन डिजिटल अरेस्ट रहा। मेरी जिंदगी पूरी तरह थम गई थी। वे मुझसे हर दो घंटे में अपडेट लेते। कहां हूं? क्या कर रहा हूं? मैं ठीक से खा और सो तक नहीं पाता था। मुझे चेतावनी दी गई कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का गोपनीय मामला है। किसी को बताया, तो पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस डर से मैंने सबसे छुपाया। पत्नी, बच्चों के सामने नॉर्मल बना रहा। मेरे चेहरे पर परेशानी देखकर घर वाले पूछते, तो मैं कुछ झूठ बोल देता।


एफडी तुड़वाकर भेज दी जमापूंजी

अपराधियों ने कहा कि बेगुनाही साबित करने के लिए सारे बैंक खातों की जांच करानी होगी। सारा पैसा आरबीआई के वेरिफिकेशन अकाउंट में भेजना होगा। जांच के बाद क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के साथ पैसा वापस आ जाएगा। ऐसा नहीं किया, तो सात साल के लिए जेल जाना होगा। मैं डर गया। एफडी तुड़वाकर करीब 90 लाख रुपये उनके बताए खातों में आरटीजीएस कर दिए। बैंक वालों से निजी जरूरतों का बहाना किया। सारा पैसा चला गया, तो उनके फोन बंद हो गए। मुझे धोखाधड़ी का अहसास हुआ। तब पुलिस को जानकारी दी। करीब 20 लाख रुपये फ्रीज करने में कामयाबी मिली। लेकिन बाकी के पैसे चले गए। मेरी सलाह है कि ऐसे फोन आने से डरें नहीं, तुरंत पुलिस से संपर्क करें।


यह भी पढ़े -शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को सीजेपी करेगा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन सिद्धांत भारद्वाज

मुंबई के साइबर पुलिस उपायुक्त बजरंग बनसोड का कहना है कि कोई भी असली पुलिस या सरकारी एजेंसी कभी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी नहीं करती। व्हाट्सएप पर अरेस्ट वारंट भी नहीं भेजे जाते। ऐसा अनजान कॉल आने पर बिना डरे तुरंत फोन काट दें। किसी से कोई ओटीपी, पासवर्ड या बैंक डिटेल्स शेयर न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

(डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो चुके नागरिक कृपया जागरूकता के लिए आगे आएं। अपनी आपबीती दैनिक भास्कर को feedback@dbhaskar.net पर बताएं।)

Created On :   30 Sept 2026 6:37 PM IST

Tags

Next Story